८. जीवन नहीं मरा करता है
पद्मभूषण गोपालदास सक्सेना 'नीरज' रचित कविता 'जीवन नहीं मरा करता है' का संपूर्ण स्वाध्याय, भावार्थ और व्याकरण।
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मैंने समझा (कविता का भावार्थ) : कवि गोपालदास सक्सेना 'नीरज' जी ने इस कविता में विविध उदाहरणों (जैसे- मटकी का फूटना, उपवन का पतझड़, रात का बीत जाना) के माध्यम से यह संदेश दिया है कि जीवन में कुछ इच्छाएँ या सपने टूट जाने से जीवन समाप्त नहीं हो जाता। जीवन शाश्वत (निरंतर चलने वाला) है। हमें असफलताओं से निराश होकर आँसू नहीं बहाने चाहिए, बल्कि हर परिस्थिति में आगे बढ़ते रहना चाहिए।
स्वाध्याय
(क) 'लाख करे पतझर कोशिश पर उपवन नहीं मरा करता है।'
अर्थ : पतझड़ के मौसम में उपवन (बगीचे) के सभी पत्ते झड़ जाते हैं, लेकिन वसंत ऋतु के आते ही वह फिर से हरा-भरा हो जाता है। इसका अर्थ यह है कि पतझड़ चाहे जितनी कोशिश कर ले, वह बगीचे को हमेशा के लिए नष्ट नहीं कर सकता। इसी प्रकार, जीवन में दुख और मुसीबतें थोड़े समय के लिए आती हैं, वे हमारे जीवन की उम्मीदों को हमेशा के लिए खत्म नहीं कर सकतीं।
(ख) 'कितनी बार गगरियाँ फूटीं शिकन न पर आई पनघट पर।'
अर्थ : पनघट (जहाँ से लोग पानी भरते हैं) पर रोज पानी भरते समय लोगों की न जाने कितनी गगरियाँ (मटकियाँ) टूट जाती हैं, लेकिन पनघट इसके लिए कभी शोक नहीं मनाता और न ही उसके चेहरे पर कोई शिकन (चिंता) आती है। वहाँ की चहल-पहल वैसी ही बनी रहती है। हमें भी कुछ नुकसान हो जाने पर हमेशा दुखी नहीं रहना चाहिए।
इस कविता का मुख्य आशय (उद्देश्य) मनुष्य को निराशा त्यागकर आशावादी बनने की प्रेरणा देना है। जीवन में कभी-कभी असफलताएँ मिलती हैं और कुछ सपने टूट जाते हैं, लेकिन इससे जीवन समाप्त नहीं होता। प्रकृति हमें सिखाती है कि जैसे अँधेरे के बाद उजाला आता है और पतझड़ के बाद वसंत, वैसे ही दुख के बाद सुख अवश्य आता है। हमें बीती बातों पर रोने के बजाय जीवन को निरंतर आगे बढ़ाना चाहिए।
जीवन की शाश्वतता (हमेशा बने रहने का भाव) बताने वाली पंक्तियाँ निम्नलिखित हैं:
- १. "कुछ सपनों के मर जाने से जीवन नहीं मरा करता है।"
- २. "कुछ दीपों के बुझ जाने से आँगन नहीं मरा करता है।"
- ३. "चंद खिलौनों के खोने से बचपन नहीं मरा करता है।"
- ४. "लाख करे पतझर कोशिश पर उपवन नहीं मरा करता है।"
- ५. "कुछ मुखड़ों की नाराजी से दर्पन नहीं मरा करता है।"
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भाषा की ओर (विरामचिह्न)
१. कामायनी महाकाव्य (कवि जयशंकर प्रसाद)
(स्पष्टीकरण : यहाँ अतिरिक्त जानकारी या नाम बताने के लिए छोटा कोष्ठक () लगाया गया है।)
२. विशाखा (लंदन से दिल्ली आती है) हवा जैसी, आने की सूचना नहीं देती।
(स्पष्टीकरण : यहाँ संवादमय या हावभाव सूचित करने के लिए छोटा कोष्ठक () लगाया गया है।)
३. { बालभारती
सुलभभारती } हिंदी की पुस्तकें हैं।
(स्पष्टीकरण : एक साधारण पद से संबंध रखने वाले अलग-अलग पंक्तियों के शब्दों को मिलाने के लिए मँझला कोष्ठक {} लगाया गया है।)
४. किसी दिन हम भी आपके ^ आएँगे।
घर
(स्पष्टीकरण : लेखन में जब कोई शब्द छूट जाता है, तब उसे पंक्ति के ऊपर लिखकर हंसपद ^ चिह्न लगाते हैं।)
अन्य कृतियाँ
यदि सूर्य का प्रकाश न होता तो पृथ्वी पर जीवन असंभव हो जाता :
- वनस्पति (Plants) : सूर्य के प्रकाश के बिना वनस्पतियाँ 'प्रकाश संश्लेषण' (Photosynthesis) नहीं कर पाएँगी, जिससे वे अपना भोजन नहीं बना सकेंगी और अंततः सूखकर नष्ट हो जाएँगी।
- मानव (Humans) : सूर्य के बिना चारों ओर अँधेरा और भयंकर ठंड होगी। खेती न होने से मानव को अन्न नहीं मिलेगा और भुखमरी व बीमारियों के कारण मानव प्रजाति समाप्त हो जाएगी।
- पशु-पक्षी (Animals & Birds) : वनस्पतियाँ न होने के कारण शाकाहारी पशु-पक्षी भूखे मरेंगे, जिसके परिणामस्वरूप मांसाहारी जीव भी समाप्त हो जाएँगे। संपूर्ण खाद्य शृंखला (Food chain) नष्ट हो जाएगी।
'दीपशिखा' शब्द के अक्षरों (दी, प, शि, खा) से बनने वाले नए अर्थपूर्ण शब्द :
| सौरऊर्जा (Solar Energy) | विवरण |
|---|---|
| १. महत्त्व (Importance) | सौरऊर्जा सूर्य से प्राप्त होने वाली प्राकृतिक और असीमित ऊर्जा है। यह पूरी तरह से प्रदूषण-मुक्त है और इससे पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं होता। कोयला और पेट्रोल जैसे ईंधन भविष्य में समाप्त हो जाएँगे, इसलिए सौरऊर्जा ही भविष्य का सबसे अच्छा और सुरक्षित विकल्प है। |
| २. प्रयोग (Uses) | आजकल सौरऊर्जा का प्रयोग सोलर कुकर (खाना पकाने के लिए), सोलर वॉटर हीटर (पानी गर्म करने के लिए), सोलर पैनल (बिजली बनाने के लिए) और सोलर लैंप (सड़कों पर रोशनी के लिए) में किया जा रहा है। इसके अलावा उपग्रहों (Satellites) को ऊर्जा भी सौर पैनलों से ही मिलती है। |