कक्षा ८ हिंदी · पहली इकाई

१. हे मातृभूमि!

कवि — रामप्रसाद 'बिस्मिल' | संपूर्ण स्वाध्याय, कविता का भावार्थ, और भाषा बिंदु। महाराष्ट्र राज्य पाठ्यपुस्तक मंडळ (सुलभभारती)।

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स्वाध्याय (सूचना के अनुसार कृतियाँ करो)

१कृति पूर्ण करो : मातृभूमि की विशेषताएँ
  • श्री राम-कृष्ण जैसे सपूतों को जन्म देने वाली
  • समुद्र नित्य जिसके चरण धोकर प्रणाम करता है
२कृति पूर्ण करो : कवि मातृभूमि के प्रति अर्पित करना चाहता है
१. मन
२. देह (शरीर)
३. भक्ति भेंट
४. शीश (सिर)
३एक शब्द में उत्तर लिखो :
  1. कवि की जिह्वा पर इसके गीत हों — मातृभूमि के
  2. मातृभूमि के चरण धोने वाला — समुद्र
  3. मातृभूमि के सपूत — श्री राम-कृष्ण
  4. प्रतिदिन सुनने/सुनाने योग्य नाम — मातृभूमि का पुण्य नाम
  5. मातृभूमि के चरणों में इसे नवाना है — शीश (सिर)
४कविता की पंक्तियाँ पूर्ण करो :

सेवा में तेरी माता ! मैं भेदभाव तजकर;
वह पुण्य नाम तेरा, प्रतिदिन सुनूँ-सुनाऊँ ।।
तेरे ही काम आऊँ, तेरा ही मंत्र गाऊँ ।
मन और देह तुम पर बलिदान मैं जाऊँ ।।

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भाषा बिंदु

★निम्न विरामचिह्नों के नाम लिखकर उनका वाक्य में प्रयोग करो : - ; ? . !
विरामचिह्ननामवाक्य में प्रयोग
-योजक चिह्नमाता-पिता की सेवा करना हमारा परम कर्तव्य है।
;अर्धविरामसूर्यास्त हो गया; पक्षी अपने घोंसलों की ओर लौट चले।
?प्रश्नवाचक चिह्नतुम कल विद्यालय क्यों नहीं आए थे?
. / ।पूर्णविरामभारत मेरा प्यारा देश है।
!विस्मयादिबोधक चिह्नवाह! कितना सुंदर दृश्य है।

उपयोजित लेखन व कल्पना पल्लवन

★शब्दों के आधार पर कहानी लिखो : ग्रंथालय, स्वप्न, पहेली, काँच

अनोखी पहेली

मोहन को किताबें पढ़ने का बहुत शौक था। एक दिन वह शहर के सबसे पुराने ग्रंथालय में गया। वहाँ उसे धूल से सनी एक पुरानी किताब मिली। उस किताब का आवरण एक मोटे काँच से ढका हुआ था। मोहन ने जैसे ही उस काँच को छुआ, उसे लगा मानो वह किसी अलग ही दुनिया में पहुँच गया हो।

उस रात मोहन को एक अद्भुत स्वप्न आया। स्वप्न में वही किताब उसके सामने खुली और उसमें से एक आवाज़ आई, "जो इस पहेली को सुलझाएगा, उसे अपार ज्ञान का भंडार मिलेगा।" पहेली थी — "जो जितना बाँटोगे, उतना बढ़ेगा।"

सुबह उठते ही मोहन समझ गया कि वह पहेली 'ज्ञान' (विद्या) के बारे में थी। उसने तय किया कि वह ग्रंथालय की पुस्तकों से जो भी ज्ञान प्राप्त करेगा, उसे अपने दोस्तों और समाज के साथ ज़रूर बाँटेगा।

★'मातृभूमि की सेवा में जीवन अर्पण करना प्रत्येक मनुष्य का कर्तव्य है,' इस कथन पर अपने विचार लिखो । [कल्पना पल्लवन]

मातृभूमि वह पावन धरती है जिस पर हम जन्म लेते हैं, जिसका अन्न जल ग्रहण करके हम बड़े होते हैं और जो हमें आश्रय देती है। इसलिए मातृभूमि हमारी माता के समान है। जिस प्रकार एक संतान का कर्तव्य अपनी माता की सेवा करना होता है, उसी प्रकार प्रत्येक मनुष्य का परम कर्तव्य अपनी मातृभूमि की रक्षा और सेवा करना है।

स्वतंत्रता सेनानियों ने इसी कर्तव्य का पालन करते हुए हँसते-हँसते अपने प्राण न्योछावर कर दिए। आज के समय में मातृभूमि की सेवा का अर्थ केवल युद्ध के मैदान में लड़ना नहीं है, बल्कि एक सच्चा नागरिक बनकर देश के विकास में योगदान देना, समाज से भेदभाव मिटाना और देश के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को ईमानदारी से निभाना भी मातृभूमि की सच्ची सेवा है।

★मैंने समझा

इस कविता से मैंने यह समझा कि मातृभूमि का स्थान जीवन में सर्वोपरि होता है। हमें अपने मन से सभी प्रकार के स्वार्थ और भेदभाव को निकालकर देशहित के लिए कार्य करना चाहिए। मातृभूमि ने हमें राम और कृष्ण जैसे आदर्श चरित्र दिए हैं। हमें भी देश के प्रति पूरी तरह समर्पित होकर अपना जीवन सार्थक बनाना चाहिए।