३. लकड़हारा और वन
लेखक — अरविंद भटनागर | संपूर्ण स्वाध्याय, प्रश्न-उत्तर, भाषा बिंदु, और लिप्यंतरण। महाराष्ट्र राज्य पाठ्यपुस्तक मंडळ (सुलभभारती)।
शेअर करेंAdvertisement
स्वाध्याय (सूचना के अनुसार कृतियाँ करो)
१. पेड़ द्वारा दिया गया संदेश —
पेड़ ने यह संदेश दिया कि मनुष्य को अपने स्वार्थ के लिए हरे-भरे पेड़ कभी नहीं काटने चाहिए। पेड़ हमें शुद्ध हवा, पानी और भोजन देते हैं तथा वन्य पशुओं का आश्रय होते हैं। हमें पेड़ों को अपने बच्चों की तरह पालना चाहिए ताकि चारों ओर हरियाली बनी रहे।
२. भगवान की शर्त —
भगवान ने लकड़हारे की ईमानदारी से प्रसन्न होकर उसे कुल्हाड़ी तो वापस दे दी, परंतु साथ ही यह शर्त रखी कि वह कभी भी हरे-भरे पेड़ों को नहीं काटेगा और न ही लालच में आकर जरूरत से अधिक सूखी लकड़ी काटेगा।
३. पेड़ों के उपयोग —
पेड़ हमें जीवित रहने के लिए शुद्ध हवा (ऑक्सीजन) प्रदान करते हैं, हवा को शुद्ध करते हैं, हमें फल, फूल और जीवनोपयोगी वस्तुएँ देते हैं तथा वन्य जीवों को आश्रय और छाया प्रदान करते हैं।
४. पेड़ों की कटाई के दुष्परिणाम —
पेड़ों की लगातार कटाई से शुद्ध हवा नहीं मिलेगी, पर्यावरण असंतुलित हो जाएगा, अच्छी वर्षा नहीं होगी, वन्य पशुओं का घर उजड़ जाएगा और अंततः यह सुंदर धरती 'सीमेंट के जंगल' में बदल जाएगी।
- चाँदी (चाँदी की कुल्हाड़ी)
- सोना (सोने की कुल्हाड़ी)
- लोहा (लोहे की कुल्हाड़ी)
Advertisement
भाषा बिंदु
| संज्ञा शब्द | संज्ञा का भेद | विशेषण शब्द | विशेषण का भेद |
|---|---|---|---|
| नदी | जातिवाचक संज्ञा | वह (लकड़हारा) | सार्वनामिक विशेषण |
| पहाड़ी | जातिवाचक संज्ञा | चार किलो | परिमाणवाचक विशेषण |
| सीता | व्यक्तिवाचक संज्ञा | दस | संख्यावाचक विशेषण |
| लकड़हारा | जातिवाचक संज्ञा | कोई | सार्वनामिक / अनिश्चयवाचक |
| पानी | द्रव्यवाचक संज्ञा | धनी | गुणवाचक विशेषण |
| गरीबी | भाववाचक संज्ञा | — | — |
| ईमानदारी | भाववाचक संज्ञा | — | — |
| गंगा | व्यक्तिवाचक संज्ञा | — | — |
| पालक | जातिवाचक संज्ञा | — | — |
| चाँदी | द्रव्यवाचक संज्ञा | — | — |
| सभा | समूहवाचक संज्ञा | — | — |
| कारक चिह्न (विभक्ति) | कारक का नाम | वाक्य में प्रयोग |
|---|---|---|
| ने | कर्ता कारक | लकड़हारे ने अपनी ईमानदारी का परिचय दिया। |
| को | कर्म कारक | भगवान ने लकड़हारे को सोने की कुल्हाड़ी दी। |
| से | करण / अपादान कारक | कुल्हाड़ी हाथ से छूटकर नदी में गिर गई। (यहाँ 'से' अलगाव के अर्थ में) |
| का / की / के | संबंध कारक | यह पेड़ हमारे जीवन की रक्षा करता है। |
| में / पर | अधिकरण कारक | कुल्हाड़ी नदी के गहरे पानी में गिर पड़ी। |
उपयोजित लेखन व मौलिक सृजन
मराठी निमंत्रण पत्रिका (मूल मराठी) :
श्री गणेशाय नमः
आपल्या शुभलग्नाचे निमंत्रण!
दिनांक: १५ मे २०२६
स्थळ: मंगल कार्यालय, पुणे।
रोमन (अंग्रेजी) लिप्यंतरण (Transliteration):
Shri Ganeshaya Namah
Aaplya shubhlagnache nimantran!
Dinank: 15 May 2026
Sthal: Mangal Karyalay, Pune.
गुरु वह होता है जो हमें सही मार्ग दिखाता है और अच्छे संस्कार देता है। इस दृष्टि से प्रकृति हमारी सबसे बड़ी और सच्ची गुरु है। सूरज हमें रोज समय पर उठने और ऊर्जा देने की प्रेरणा देता है, नदियाँ बिना किसी स्वार्थ के लगातार बहकर परोपकार का पाठ पढ़ाती हैं, और पेड़ अपने ऊपर कुल्हाड़ी चलाने वाले को भी मीठे फल और ठंडी छाया देते हैं।
प्रकृति हमें धैर्य, सहिष्णुता, प्रेम और समानता का पाठ पढ़ाती है। वह हमें सिखाती है कि जीवन में बिना कुछ कहे केवल कर्म करते जाना चाहिए। यदि हम प्रकृति के इन गुणों को अपने जीवन में उतार लें, तो हमारा जीवन सफल और सार्थक हो जाएगा।
इस एकांकी से मैंने यह समझा कि ईमानदारी का फल हमेशा मीठा होता है। लालच बुरी बला है, जिससे इंसान का पतन होता है। इसके अलावा मैंने यह भी सीखा कि पेड़-पौधे और जंगल हमारे जीवन का आधार हैं। यदि हम इन्हें इसी तरह काटते रहे, तो हमारा अपना अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। इसलिए हमें पर्यावरण की रक्षा करनी चाहिए और अधिक से अधिक पेड़ लगाने चाहिए।