कक्षा ८ हिंदी · दूसरी इकाई

३. लकड़हारा और वन

लेखक — अरविंद भटनागर | संपूर्ण स्वाध्याय, प्रश्न-उत्तर, भाषा बिंदु, और लिप्यंतरण। महाराष्ट्र राज्य पाठ्यपुस्तक मंडळ (सुलभभारती)।

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स्वाध्याय (सूचना के अनुसार कृतियाँ करो)

१संजाल पूर्ण करो : कुल्हाड़ी पानी में गिरने के कारण खड़ी हुई समस्याएँ
१. पानी गहरा था और लकड़हारे को तैरना नहीं आता था।
२. लकड़हारे की रोजी-रोटी का साधन (कुल्हाड़ी) छिन गया था।
३. लकड़ी न बिकने से आज की रोटी का इंतजाम कैसे होगा, यह चिंता थी।
४. बच्चे भूखे रह जाते, अतः घर चलाने का संकट खड़ा हो गया था।
२संक्षेप में उत्तर लिखो :

१. पेड़ द्वारा दिया गया संदेश —
पेड़ ने यह संदेश दिया कि मनुष्य को अपने स्वार्थ के लिए हरे-भरे पेड़ कभी नहीं काटने चाहिए। पेड़ हमें शुद्ध हवा, पानी और भोजन देते हैं तथा वन्य पशुओं का आश्रय होते हैं। हमें पेड़ों को अपने बच्चों की तरह पालना चाहिए ताकि चारों ओर हरियाली बनी रहे।

२. भगवान की शर्त —
भगवान ने लकड़हारे की ईमानदारी से प्रसन्न होकर उसे कुल्हाड़ी तो वापस दे दी, परंतु साथ ही यह शर्त रखी कि वह कभी भी हरे-भरे पेड़ों को नहीं काटेगा और न ही लालच में आकर जरूरत से अधिक सूखी लकड़ी काटेगा।

३. पेड़ों के उपयोग —
पेड़ हमें जीवित रहने के लिए शुद्ध हवा (ऑक्सीजन) प्रदान करते हैं, हवा को शुद्ध करते हैं, हमें फल, फूल और जीवनोपयोगी वस्तुएँ देते हैं तथा वन्य जीवों को आश्रय और छाया प्रदान करते हैं।

४. पेड़ों की कटाई के दुष्परिणाम —
पेड़ों की लगातार कटाई से शुद्ध हवा नहीं मिलेगी, पर्यावरण असंतुलित हो जाएगा, अच्छी वर्षा नहीं होगी, वन्य पशुओं का घर उजड़ जाएगा और अंततः यह सुंदर धरती 'सीमेंट के जंगल' में बदल जाएगी।

३कृति पूर्ण करो : पाठ में प्रयुक्त धातुओं के नाम
  • चाँदी (चाँदी की कुल्हाड़ी)
  • सोना (सोने की कुल्हाड़ी)
  • लोहा (लोहे की कुल्हाड़ी)

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भाषा बिंदु

१निम्नलिखित वृत्त में दिए संज्ञा तथा विशेषण शब्दों को छाँटकर तालिका में उचित स्थानों पर उनके भेद सहित लिखो : नदी, पहाड़ी, सीता, वह लकड़हारा, पानी, चार किलो, गरीबी, ईमानदारी, गंगा, पालक, दस, चाँदी, कोई, सभा, धनी
संज्ञा शब्दसंज्ञा का भेदविशेषण शब्दविशेषण का भेद
नदीजातिवाचक संज्ञावह (लकड़हारा)सार्वनामिक विशेषण
पहाड़ीजातिवाचक संज्ञाचार किलोपरिमाणवाचक विशेषण
सीताव्यक्तिवाचक संज्ञादससंख्यावाचक विशेषण
लकड़हाराजातिवाचक संज्ञाकोईसार्वनामिक / अनिश्चयवाचक
पानीद्रव्यवाचक संज्ञाधनीगुणवाचक विशेषण
गरीबीभाववाचक संज्ञा——
ईमानदारीभाववाचक संज्ञा——
गंगाव्यक्तिवाचक संज्ञा——
पालकजातिवाचक संज्ञा——
चाँदीद्रव्यवाचक संज्ञा——
सभासमूहवाचक संज्ञा——
२पाठ में प्रयुक्त कारक विभक्तियाँ ढूँढ़कर उनका वाक्यों में प्रयोग करो।
कारक चिह्न (विभक्ति)कारक का नामवाक्य में प्रयोग
नेकर्ता कारकलकड़हारे ने अपनी ईमानदारी का परिचय दिया।
कोकर्म कारकभगवान ने लकड़हारे को सोने की कुल्हाड़ी दी।
सेकरण / अपादान कारककुल्हाड़ी हाथ से छूटकर नदी में गिर गई। (यहाँ 'से' अलगाव के अर्थ में)
का / की / केसंबंध कारकयह पेड़ हमारे जीवन की रक्षा करता है।
में / परअधिकरण कारककुल्हाड़ी नदी के गहरे पानी में गिर पड़ी।

उपयोजित लेखन व मौलिक सृजन

★किसी मराठी निमंत्रण पत्रिका का रोमन (अंग्रेजी) में लिप्यंतरण करो। [उपयोजित लेखन]

मराठी निमंत्रण पत्रिका (मूल मराठी) :
श्री गणेशाय नमः
आपल्या शुभलग्नाचे निमंत्रण!
दिनांक: १५ मे २०२६
स्थळ: मंगल कार्यालय, पुणे।

रोमन (अंग्रेजी) लिप्यंतरण (Transliteration):
Shri Ganeshaya Namah
Aaplya shubhlagnache nimantran!
Dinank: 15 May 2026
Sthal: Mangal Karyalay, Pune.

★'प्रकृति हमारी गुरु' विषय पर अपने विचार लिखो। [मौलिक सृजन]

गुरु वह होता है जो हमें सही मार्ग दिखाता है और अच्छे संस्कार देता है। इस दृष्टि से प्रकृति हमारी सबसे बड़ी और सच्ची गुरु है। सूरज हमें रोज समय पर उठने और ऊर्जा देने की प्रेरणा देता है, नदियाँ बिना किसी स्वार्थ के लगातार बहकर परोपकार का पाठ पढ़ाती हैं, और पेड़ अपने ऊपर कुल्हाड़ी चलाने वाले को भी मीठे फल और ठंडी छाया देते हैं।

प्रकृति हमें धैर्य, सहिष्णुता, प्रेम और समानता का पाठ पढ़ाती है। वह हमें सिखाती है कि जीवन में बिना कुछ कहे केवल कर्म करते जाना चाहिए। यदि हम प्रकृति के इन गुणों को अपने जीवन में उतार लें, तो हमारा जीवन सफल और सार्थक हो जाएगा।

★मैंने समझा

इस एकांकी से मैंने यह समझा कि ईमानदारी का फल हमेशा मीठा होता है। लालच बुरी बला है, जिससे इंसान का पतन होता है। इसके अलावा मैंने यह भी सीखा कि पेड़-पौधे और जंगल हमारे जीवन का आधार हैं। यदि हम इन्हें इसी तरह काटते रहे, तो हमारा अपना अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा। इसलिए हमें पर्यावरण की रक्षा करनी चाहिए और अधिक से अधिक पेड़ लगाने चाहिए।