३. इनाम
अरुण — हास्य-व्यंग्य निबंध का संजाल, व्याकरण (वाक्य भेद, कि/की), मौलिक सृजन और पाठ के आँगन में (स्वाध्याय) के सभी प्रश्नों के उत्तर।
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पाठ का परिचय : प्रस्तुत हास्य-व्यंग्यात्मक निबंध 'इनाम' लेखक अरुण जी द्वारा रचित है। इसमें रेफ्रीजरेटर (फ्रिज) का आधार लेकर समाज में व्याप्त मुफ्तखोरी, ईर्ष्या, और रिश्तेदारों व पड़ोसियों के दिखावटी व्यवहार पर करारा व्यंग्य किया गया है ।
पाठ के आँगन में (स्वाध्याय)
(क) पाठ में आए और हिंदी में प्रयुक्त होने वाले पाँच-पाँच विदेशी एवं संकर शब्दों की सूची बनाइए :
| विदेशी शब्द | संकर शब्द (दो भाषाओं के मेल से बने) |
|---|---|
| १. रेफ्रीजरेटर | १. लाठीचार्ज (हिंदी + अंग्रेजी) |
| २. रेडियो | २. टिकटघर (अंग्रेजी + हिंदी) |
| ३. आइसक्रीम | ३. रेलगाड़ी (अंग्रेजी + हिंदी) |
| ४. टेलीफोन | ४. बिजली-कंपनी (हिंदी + अंग्रेजी) |
| ५. लॉटरी | ५. उड़नतश्तरी (हिंदी + फारसी) |
(ख) वाक्य में 'कि', 'की' के स्थान को स्पष्ट कीजिए : 'माँ ने कहा कि बच्चों ने आम की आइसक्रीम तैयार की।'
कि - यह एक योजक (समुच्चयबोधक) है, जो दो उपवाक्यों ('माँ ने कहा' और 'बच्चों ने आम की आइसक्रीम तैयार की') को जोड़ने का काम कर रहा है ।
की - यह संबंध कारक का चिह्न है, जो 'आम' और 'आइसक्रीम' के बीच का संबंध बता रहा है (आइसक्रीम किसकी है? आम की) ।
की (अंत में) - यह 'करना' क्रिया का भूतकालिक रूप है ('तैयार की') ।
(ग) रेफ्रीजरेटर आने के पूर्व घरवालों के विचार -
(घ) रेफ्रीजरेटर आने के बाद घर की स्थिति -
भाषा बिंदु (वाक्य के प्रकार)
| सरल वाक्य | संयुक्त वाक्य | मिश्र वाक्य |
|---|---|---|
| १. मैंने एक दुबला-पतला व्यक्ति देखा । | १. गौतमी ने कहानी सुनाई और गीता रो पड़ी । | १. उसने कहा कि मैं परिश्रमी हूँ। |
| २. कैलाश ने ऊपर नीचे झाँका । | २. कटोरा ले लिया गया और रेफ्रीजरेटर में रख दिया गया। | २. उसका आना था कि सगे-संबंधियों में धूम मच गई । |
| ३. शांति बुआ ने शुरुआत की। | ३. अमिता खाली बोतलें भरकर लगा रही थी और हेमंत पानी पिला रहा था। | ३. जब बिजली का बिल आएगा तब बच्चू को पता लगेगा। |
| ४. हेमंत बोतलों से पानी पिला रहा था। | ४. मैंने जोर दिया पर वे नहीं माने। | ४. जब भला आदमी इनकार कर रहा था तब हम जबरदस्ती कैसे करते? |
व्याकरण का नियम : सरल वाक्य में एक ही क्रिया होती है। संयुक्त वाक्य में 'और, तथा, या, पर, किंतु' जैसे योजक जुड़े होते हैं। मिश्र वाक्य में एक मुख्य उपवाक्य और दूसरा आश्रित उपवाक्य (जैसे जो-वह, जब-तब) होता है।
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अभिव्यक्ति (मौलिक सृजन / लेखनीय / संभाषणीय)
प्रकृति ने मानव को जीवन जीने के लिए कई बहुमूल्य उपहार दिए हैं, जिन्हें प्राकृतिक संसाधन कहा जाता है। जल, वायु, सूर्य का प्रकाश, मिट्टी, वन (पेड़-पौधे) और खनिज पदार्थ इसी के उदाहरण हैं। सचमुच, ये प्राकृतिक संसाधन मानव के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं।
बिना जल और वायु के पृथ्वी पर जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। जंगलों से हमें लकड़ियाँ, औषधियाँ और प्राणवायु (ऑक्सीजन) मिलती है। सूर्य का प्रकाश न केवल ऊर्जा का असीम स्रोत है, बल्कि कृषि के लिए भी आवश्यक है। भूमि से प्राप्त खनिज पदार्थों (जैसे लोहा, कोयला, पेट्रोल) ने मानव के औद्योगिक विकास की नींव रखी है। परंतु मनुष्य अपने लालच में इन संसाधनों का अंधाधुंध उपयोग कर रहा है, जिससे ये वरदान अब संकट में आ गए हैं। अतः हमें इस प्राकृतिक वरदान का सम्मान करते हुए इनका संरक्षण करना चाहिए।
हमारे शहर (नागपुर) को बिजली आपूर्ति मुख्य रूप से 'महाराष्ट्र राज्य विद्युत वितरण कंपनी मर्यादित (MSEDCL / महावितरण)' द्वारा की जाती है। इस आपूर्ति का मुख्य स्रोत 'कोराडी थर्मल पावर स्टेशन' (Koradi Thermal Power Station) और 'खापरखेड़ा थर्मल पावर स्टेशन' है, जहाँ कोयले (Coal) का उपयोग करके बिजली का उत्पादन किया जाता है।
बिजली उत्पादन केंद्र से उच्च दाब (High Voltage) पर बिजली हमारे शहर के मुख्य सब-स्टेशनों (Sub-stations) तक पहुँचती है। यहाँ ट्रांसफार्मर (Transformer) की मदद से वोल्टेज को कम किया जाता है और फिर वितरण लाइनों के माध्यम से इसे हमारे घरों, स्कूलों और कारखानों तक सुरक्षित रूप से पहुँचाया जाता है। इस पूरी प्रणाली का नियंत्रण स्थानीय बिजली बोर्ड द्वारा किया जाता है ताकि हमें बिना रुकावट के बिजली मिल सके।
ईंधन (Fuel) हमारे दैनिक जीवन और देश के विकास का एक महत्त्वपूर्ण हिस्सा है। ईंधन से चलने वाले साधन जैसे कार, मोटरसाइकिल, बस, ट्रक, ट्रेन और हवाई जहाज पेट्रोल, डीजल या कोयले से चलते हैं। इसके अलावा ईंधन का उपयोग कल-कारखानों, बिजली उत्पादन केंद्रों और घरों में खाना पकाने (LPG गैस) के क्षेत्र में भी बड़े पैमाने पर होता है।
बचत की आवश्यकता : पेट्रोल, डीजल और कोयला प्राकृतिक संसाधन हैं और इनके भंडार सीमित हैं। इन्हें बनने में लाखों वर्ष लगते हैं। यदि हम इसी तरह अंधाधुंध ईंधन का उपयोग करते रहे, तो भविष्य की पीढ़ियों के लिए कुछ भी नहीं बचेगा। इसके अलावा, ईंधन जलने से पर्यावरण में भारी प्रदूषण भी होता है। इसलिए समय की यही माँग है कि हम सार्वजनिक वाहनों का उपयोग करें, कार-पूलिंग करें और सौर ऊर्जा (Solar Energy) जैसे वैकल्पिक साधनों को अपनाएँ, ताकि ईंधन की बचत हो सके।
समुद्री लहरों से विद्युत का निर्माण करना एक बहुत ही आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल (Eco-friendly) तकनीक है। इसे Tidal Energy या Wave Energy (ज्वारीय ऊर्जा) कहा जाता है।
समुद्र में आने वाले ज्वार-भाटे (Tides) और तेज लहरों में बहुत अधिक गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy) होती है। समुद्र के किनारे या भीतर बड़े-बड़े टरबाइन (Turbines) स्थापित किए जाते हैं। जब समुद्र की लहरें तेजी से इन टरबाइनों से टकराती हैं, तो उनके पंखे घूमने लगते हैं। इन टरबाइनों से एक जनरेटर जुड़ा होता है, जो लहरों की यांत्रिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा (Electricity) में बदल देता है। यह ऊर्जा का एक ऐसा स्रोत है जो कभी खत्म नहीं होगा (Renewable Source) और इससे पर्यावरण में कोई प्रदूषण भी नहीं होता। भारत में भी तटीय क्षेत्रों में इसके प्रयोग किए जा रहे हैं।
जब किसी व्यक्ति को उसकी मेहनत और प्रतिभा के लिए इनाम या प्रशंसापत्र मिलता है, तो वह क्षण जीवन भर याद रहता है। मुझे भी ऐसा ही एक प्रसंग याद है। पिछले वर्ष विद्यालय के वार्षिक उत्सव (Annual Function) में मुझे 'सर्वश्रेष्ठ विद्यार्थी' (Best Student) का पुरस्कार मिला था।
जब मंच से मेरा नाम पुकारा गया, तो मेरे माता-पिता का चेहरा खुशी और गर्व से चमक उठा था। मुख्य अतिथि के हाथों से चमकती हुई ट्रॉफी और प्रशंसापत्र लेते समय मेरी धड़कनें तेज हो गई थीं। पूरे सभागार में गूँजती तालियों की गड़गड़ाहट ने मुझे भीतर से रोमांचित कर दिया। उस इनाम ने न केवल मेरी पिछली मेहनत को सार्थक किया, बल्कि भविष्य में और भी बेहतर करने की प्रेरणा दी। सचमुच, इनाम एक ऐसी संजीवनी है जो इंसान का उत्साह दोगुना कर देती है।