कक्षा ९ हिंदी · दूसरी इकाई

५. अतीत के पत्र

विनोबा और गांधीजी — उचित जोड़ियाँ, स्वास्थ्य सुधार के कार्य, भाषा बिंदु (वाक्य परिवर्तन), मौलिक सृजन (सपनों का भारत) और सभी स्वाध्याय के उत्तर।

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पाठ का परिचय : प्रस्तुत पाठ 'अतीत के पत्र' में विनोबा भावे और महात्मा गांधीजी के बीच पत्राचार को दर्शाया गया है। विनोबा जी के पत्र में उनका दृढ़ निश्चय, अनुशासन, परिश्रम और गांधीजी के प्रति अटूट श्रद्धा दिखाई देती है, जबकि गांधीजी के पत्र में विनोबा जी के प्रति उनका विश्वास और पितृतुल्य प्रेम झलकता है ।

पाठ के आँगन में (स्वाध्याय)

१सूचना के अनुसार कृतियाँ कीजिए :-

(ख) उचित जोड़ियाँ मिलाइए :

समूह 'अ'समूह 'आ' (सही उत्तर)
१. विद्यार्थी मंडलसंस्था
२. राष्ट्रीय शिक्षायोजना
३. विनोबा जी का साध्यआश्रम
४. ब्रह्मचर्यव्रत

स्वास्थ्य सुधार के लिए विनोबा जी द्वारा किए गए कार्य :

१. प्रतिदिन दस-बारह मील घूमना।
२. छह से आठ सेर अनाज पीसना।
३. तीन सौ (३००) सूर्य नमस्कार करना।
४. आहार में नमक और मसालों का त्याग कर देना।

(ग) अर्थ लिखिए :

  1. १. 'अपरिग्रह' शब्द से तात्पर्य है कि — जीवन-यापन के लिए आवश्यकता से अधिक वस्तुओं का संग्रह न करना।
  2. २. 'रमता राम' शब्द से तात्पर्य है कि — फक्कड़ या ऐसा व्यक्ति जो किसी एक स्थान पर न टिककर निरंतर भ्रमण करता रहता हो।
२'स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मन का वास होता है' - इस पर स्वमत लिखिए।

यह एक पुरानी और सर्वमान्य कहावत है कि "स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का वास होता है।" मनुष्य का शरीर और उसका मन एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हुए हैं। यदि हमारा शरीर बीमार या कमजोर है, तो हम किसी भी काम में ध्यान केंद्रित नहीं कर सकते और हमारा मन उदास व चिड़चिड़ा हो जाता है।

जब हम उचित व्यायाम (जैसे विनोबा जी सूर्य नमस्कार और पैदल घूमना करते थे), योग और संतुलित आहार के माध्यम से अपने शरीर को स्वस्थ रखते हैं, तो हमारे भीतर सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। एक स्वस्थ व्यक्ति ही मानसिक रूप से मजबूत होता है और कठिन परिस्थितियों का सामना पूरे आत्मविश्वास और धैर्य के साथ कर सकता है। अतः जीवन में सफलता और मानसिक शांति पाने के लिए शारीरिक स्वास्थ्य सबसे बड़ी आवश्यकता है।

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भाषा बिंदु (वाक्य परिवर्तन)

३अर्थ की दृष्टि से वाक्य परिवर्तित करके लिखिए :- "सब तुमसे मिलने को उत्सुक हैं।"

मूल वाक्य : सब तुमसे मिलने को उत्सुक हैं।

वाक्य का प्रकारपरिवर्तित वाक्य
१. विधानार्थकसब तुमसे मिलने को उत्सुक हैं। (मूल वाक्य)
२. निषेधार्थकसब तुमसे मिलने को उत्सुक नहीं हैं। (या - कोई तुमसे मिलने को उत्सुक नहीं है।)
३. प्रश्नार्थकक्या सब तुमसे मिलने को उत्सुक हैं?
४. आज्ञार्थकतुम सब उससे मिलने को उत्सुक रहो।
५. विस्मयार्थकअहा ! सब तुमसे मिलने को उत्सुक हैं!
६. संदेहार्थकशायद सब तुमसे मिलने को उत्सुक हों।

अभिव्यक्ति (मौलिक सृजन / लेखनीय)

४मौलिक सृजन : 'मेरे सपनों का भारत' विषय पर अपने विचार लिखिए।

भारत एक महान देश है, और 'मेरे सपनों का भारत' वह देश है जहाँ हर नागरिक शिक्षित, स्वस्थ और सुरक्षित हो। मेरे सपनों के भारत में गरीबी, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार जैसी बुराइयों के लिए कोई स्थान नहीं होगा।

मैं एक ऐसा भारत चाहता हूँ जहाँ सभी धर्मों और जातियों के लोग बिना किसी भेदभाव के एक साथ मिलकर रहें। जहाँ हर बच्चे को समान और अच्छी शिक्षा मिले, और महिलाओं का पूरा सम्मान हो। मेरे सपनों के भारत में गाँवों का विकास शहरों के समान होगा, और प्राकृतिक संसाधनों (पेड़-पौधों, नदियों) का संरक्षण किया जाएगा। भारत न केवल तकनीकी और आर्थिक रूप से दुनिया का सिरमौर बनेगा, बल्कि शांति, भाईचारे और वसुधैव कुटुंबकम् के अपने प्राचीन संदेश से पूरी दुनिया का मार्गदर्शन भी करेगा।

५लेखनीय : 'गांधी जयंती' के अवसर पर आकर्षक कार्यक्रम पत्रिका तैयार कीजिए।

॥ गांधी जयंती समारोह ॥

आप सभी को यह जानकर हर्ष होगा कि हमारे विद्यालय में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की जयंती के पावन अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। आप सभी सादर आमंत्रित हैं।

दिनांक : २ अक्टूबर २०२६
समय : सुबह ८:०० बजे से १०:३० बजे तक
स्थान : विद्यालय का मुख्य प्रांगण


कार्यक्रम की रूपरेखा :

  • ८:०० बजे : बापू की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन
  • ८:१५ बजे : 'वैष्णव जन तो तेणे कहिए' भजन की संगीतमय प्रस्तुति
  • ८:४५ बजे : विद्यार्थियों द्वारा गांधीजी के जीवन पर भाषण और विचार प्रस्तुति
  • ९:३० बजे : 'स्वच्छ भारत अभियान' के अंतर्गत श्रमदान (सफाई अभियान)
  • १०:१५ बजे : प्रधानाचार्य जी का संबोधन एवं आभार प्रदर्शन

आयोजक :
सांस्कृतिक समिति, सरस्वती विद्या मंदिर