कक्षा 10 हिंदी · स्पर्श भाग 2 · निदा फ़ाज़ली · गद्य खंड

12. अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले

निदा फ़ाज़ली का पाठ — सार, प्रश्न-उत्तर, आशय और भाषा अध्ययन. NCERT हिंदी स्पर्श (भाग 2).

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पाठ का परिचय : ‘अब कहाँ दूसरे के दुख से दुखी होने वाले’ निदा फ़ाज़ली का पाठ है। इसमें लेखक बताते हैं कि पहले लोग पशु-पक्षियों के दुख से भी दुखी हो जाते थे, पर आज बढ़ती आबादी और स्वार्थ ने प्रकृति का संतुलन बिगाड़ दिया है। मनुष्य ने दूसरे जीवों से उनका घर छीन लिया है।

पाठ का सार

★पाठ संक्षेप में

बादशाह सुलेमान पशु-पक्षियों की भाषा जानते थे। एक बार उनका लश्कर चींटियों के रास्ते से गुजरा। घोड़ों की टापों से डरी चींटियों की बात सुनकर वे रुक गए और बोले कि मैं किसी के लिए मुसीबत नहीं हूँ, सबके लिए मुहब्बत हूँ। सिंधी कवि शेख अयाज़ के पिता ने अपनी बाँह पर आए काले च्योंटे को कुएँ पर उसके घर छोड़ने के लिए भोजन बीच में छोड़ दिया। नूह ने एक घायल कुत्ते को दुत्कारा, तो कुत्ते की बात सुनकर वे जीवन भर पछताते और रोते रहे।

लेखक की माँ कहती थीं कि सूरज ढलने के बाद पेड़ों के पत्ते मत तोड़ो, पेड़ रोएँगे। ग्वालियर में कबूतर का एक अंडा माँ के हाथ से टूट गया, तो उन्होंने पूरे दिन रोज़ा रखकर खुदा से माफ़ी माँगी।

आज बंबई (मुंबई) के वर्सोवा में जहाँ जंगल था, वहाँ बस्तियाँ बन गई हैं। बिल्डरों ने समुद्र को पीछे धकेला, तो समुद्र ने गुस्से में तीन जहाजों को उठाकर फेंक दिया। बढ़ती आबादी के कारण पशु-पक्षी बेघर हो गए हैं। लेखक के फ्लैट में कबूतरों के घोंसले से परेशान होकर उनकी पत्नी ने जाली लगवा दी। लेखक दुखी होकर कहते हैं कि अब दूसरों के दुख से दुखी होने वाले लोग कहाँ हैं।

मौखिक — एक-दो पंक्तियों में उत्तर

1बड़े-बड़े बिल्डर समुद्र को पीछे क्यों धकेल रहे थे?

बढ़ती आबादी के लिए बस्तियाँ बसाने हेतु जमीन चाहिए थी। इसलिए बिल्डर समुद्र को पीछे धकेलकर उसकी जमीन पर बस्तियाँ बना रहे थे।

2लेखक का घर किस शहर में था?

लेखक का घर ग्वालियर शहर में था। बाद में वे बंबई (मुंबई) के वर्सोवा में रहने लगे।

3जीवन कैसे घरों में सिमटने लगा है?

जीवन अब छोटे-छोटे डिब्बे जैसे घरों (फ़्लैटों) में सिमटने लगा है।

4कबूतर परेशानी में इधर-उधर क्यों फड़फड़ा रहे थे?

उनके अंडे टूट गए थे। एक अंडा बिल्ली ने तोड़ दिया और दूसरा लेखक की माँ के हाथ से गिरकर टूट गया। इसलिए कबूतर परेशान होकर फड़फड़ा रहे थे।

लिखित (क) — 25-30 शब्दों में उत्तर

1अरब में लशकर को नूह के नाम से क्यों याद करते हैं?

लशकर ने एक घायल कुत्ते को ‘गंदे कुत्ते’ कहकर दुत्कारा था। कुत्ते ने कहा कि न मैं अपनी मर्ज़ी से कुत्ता हूँ, न तुम अपनी पसंद से इंसान हो, बनाने वाला सबका एक है। यह सुनकर वे इतने दुखी हुए कि सारी उम्र रोते रहे। इसीलिए उन्हें ‘नूह’ के नाम से याद किया जाता है।

2लेखक की माँ किस समय पेड़ों के पत्ते तोड़ने के लिए मना करती थीं और क्यों?

लेखक की माँ सूरज ढलने के बाद पेड़ों से पत्ते तोड़ने के लिए मना करती थीं। उनका मानना था कि उस समय पत्ते तोड़ने से पेड़ रोते हैं। वे पेड़ों को भी सजीव मानती थीं।

3प्रकृति में आए असंतुलन का क्या परिणाम हुआ?

प्रकृति में असंतुलन से गर्मी में बहुत गर्मी पड़ने लगी है और बेवक्त की बरसातें होने लगी हैं। भूकंप, सैलाब, तूफ़ान और नए-नए रोग बढ़ गए हैं। पशु-पक्षी बेघर हो गए हैं।

4लेखक की माँ ने पूरे दिन का रोज़ा क्यों रखा?

माँ कबूतर के बचे हुए अंडे को बचाना चाहती थीं, पर वह उनके हाथ से गिरकर टूट गया। कबूतरों का दुख देखकर उन्हें लगा कि उनसे गुनाह हो गया। इस गुनाह की माफ़ी के लिए उन्होंने पूरे दिन रोज़ा रखा।

5लेखक ने ग्वालियर से बंबई तक किन बदलावों को महसूस किया? पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।

ग्वालियर में बड़े-बड़े दालान-आँगन वाले घर थे और लोग पशु-पक्षियों का दुख समझते थे। बंबई में जंगल काटकर बस्तियाँ बन गईं। घर डिब्बों जैसे फ़्लैट बन गए। पशु-पक्षी बेघर हो गए और लोगों में संवेदनशीलता कम हो गई।

6‘डेरा डालने’ से आप क्या समझते हैं? स्पष्ट कीजिए।

‘डेरा डालना’ का अर्थ है — कुछ समय के लिए कहीं अस्थायी रूप से रहना। बस्तियाँ बनने से बेघर हुए जो पशु-पक्षी शहर छोड़कर नहीं जा सके, उन्होंने इधर-उधर अस्थायी ठिकाने बना लिए हैं।

7शेख अयाज़ के पिता अपने बाजू पर काला च्योंटा रेंगता देख भोजन छोड़कर क्यों उठ खड़े हुए?

उन्हें लगा कि कुएँ पर नहाते समय वे च्योंटे को उसके घर से अलग कर लाए हैं। उन्होंने एक घरवाले को बेघर कर दिया है। इसलिए वे भोजन छोड़कर उसे कुएँ पर उसके घर छोड़ने चल पड़े।

लिखित (ख) — 50-60 शब्दों में उत्तर

1बढ़ती हुई आबादी का पर्यावरण पर क्या प्रभाव पड़ा?

बढ़ती आबादी के लिए जंगल काटे गए और समुद्र को पीछे धकेलकर बस्तियाँ बनाई गईं। पेड़-पौधे कम होने से पशु-पक्षी बेघर हो गए। प्रकृति का संतुलन बिगड़ गया। अधिक गर्मी, बेवक्त बरसात, भूकंप, बाढ़, तूफ़ान और नए-नए रोग बढ़ गए। प्रदूषण भी बढ़ गया।

2लेखक की पत्नी को खिड़की में जाली क्यों लगवानी पड़ी?

लेखक के फ़्लैट में कबूतरों ने घोंसला बना लिया था। वे दिन में कई बार आते-जाते थे। कभी कोई चीज़ गिराकर तोड़ देते, तो कभी लाइब्रेरी में घुसकर कबीर या मिर्ज़ा ग़ालिब की किताबों को सताने लगते। इस रोज़-रोज़ की परेशानी से तंग आकर लेखक की पत्नी ने जाली लगवा दी।

3समुद्र के गुस्से की क्या वजह थी? उसने अपना गुस्सा कैसे निकाला?

बिल्डर समुद्र को लगातार पीछे धकेलकर उसकी जमीन पर बस्तियाँ बना रहे थे। उसकी जगह सिमटती जा रही थी। इसी से समुद्र को गुस्सा आया।

उसने एक रात अपनी लहरों पर तीन जहाजों को उठाकर गेंद की तरह फेंक दिया। एक वर्ली के किनारे, दूसरा बांद्रा में कार्टर रोड के सामने और तीसरा गेटवे ऑफ़ इंडिया पर टूट-फूटकर गिरा।

4‘मिट्टी से मिट्टी मिले, खो के सभी निशान ...’ इन पंक्तियों के माध्यम से लेखक क्या कहना चाहता है?

लेखक कहना चाहते हैं कि सभी प्राणी एक ही मिट्टी से बने हैं और अंत में उसी मिट्टी में मिल जाते हैं। तब यह पहचानना कठिन है कि किसमें कितना अंश किसका है। इसलिए मनुष्य को अपने आप को दूसरे जीवों से बड़ा नहीं समझना चाहिए। सबके प्रति प्रेम और समानता का भाव रखना चाहिए।

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लिखित (ग) — आशय स्पष्ट कीजिए

1‘नेचर की सहनशक्ति की एक सीमा होती है ...’

प्रकृति बहुत कुछ सहती है, पर जब मनुष्य उसके साथ हद से ज्यादा छेड़छाड़ करता है, तो वह भी गुस्सा दिखाती है। बंबई में समुद्र द्वारा तीन जहाजों को फेंकना इसका एक उदाहरण था।

2‘जो जितना बड़ा होता है उसे उतना ही कम गुस्सा आता है।’

बड़े और महान लोग जल्दी क्रोधित नहीं होते। वे बहुत कुछ सह लेते हैं। पर जब उन्हें गुस्सा आता है, तो उसे रोकना कठिन हो जाता है। समुद्र भी ऐसा ही है।

3‘इस बस्ती ने न जाने कितने परिंदों-चरिंदों से उनका घर छीन लिया है ...’

नई बस्तियों के लिए जंगल काट दिए गए, जिससे पशु-पक्षी बेघर हो गए। कुछ शहर छोड़कर चले गए और जो नहीं जा सके, वे इधर-उधर अस्थायी ठिकानों पर रहने को मजबूर हैं।

4‘मैंने एक घरवाले को बेघर कर दिया है ...’

शेख अयाज़ के पिता बहुत दयालु और संवेदनशील थे। वे छोटे-से च्योंटे के घर को भी उतना ही महत्त्वपूर्ण मानते थे जितना मनुष्य के घर को। उन्हें लगा कि उन्होंने एक जीव को उसके परिवार से अलग कर दिया है, इसलिए वे भोजन छोड़कर उसे उसके घर छोड़ने चल पड़े।

भाषा अध्ययन

1कारक चिह्न पहचानकर नाम लिखिए
वाक्यकारक चिह्न — कारक
(क) माँ ने भोजन परोसा।ने — कर्ता कारक
(ख) मैं किसी के लिए मुसीबत नहीं हूँ।के लिए — संप्रदान कारक
(ग) मैंने एक घर वाले को बेघर कर दिया।ने — कर्ता कारक; को — कर्म कारक
(घ) कबूतर परेशानी में इधर-उधर फड़फड़ा रहे थे।में — अधिकरण कारक
(ङ) दरिया पर जाओ तो उसे सलाम किया करो।पर — अधिकरण कारक
2बहुवचन रूप

चींटी — चींटियाँघोड़ा — घोड़ेआवाज़ — आवाज़ेंबिल — बिलोंफ़ौज — फ़ौजेंरोटी — रोटियाँबिंदु — बिंदुओंदीवार — दीवारेंटुकड़ा — टुकड़े

3नुक्ता सहित/रहित उचित शब्द भरिए
  1. आजकल ज़माना बहुत खराब है।
  2. पूरे कमरे को सजा दो।
  3. ज़रा चीनी तो देना।
  4. माँ दही जमाना भूल गई।
  5. दोषी को सज़ा दी गई।
  6. महात्मा के चेहरे पर तेज था।

योग्यता विस्तार और परियोजना कार्य

शब्दार्थ

शब्दअर्थ
हाकिमराजा, मालिक
लश्करसेना
लकबपदसूचक नाम
अज़ीज़प्रिय
मज़ारदरगाह, कब्र
गुंबदमस्जिद, मंदिर या मकबरे के ऊपर बनी गोल छत
अज़ाननमाज़ के समय की सूचना जो मस्जिद की छत पर खड़े होकर दी जाती है
सैलाबबाढ़
सिमटनासिकुड़ना
जलजलेभूकंप
डेराअस्थायी पड़ाव
आशियानाघर