कक्षा 10 हिंदी · स्पर्श भाग 2 · रवींद्र केलेकर · गद्य खंड

13. पतझर में टूटी पत्तियाँ

गिन्नी का सोना और झेन की देन — सार, प्रश्न-उत्तर, आशय और भाषा अध्ययन. NCERT हिंदी स्पर्श (भाग 2).

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पाठ का परिचय : ‘पतझर में टूटी पत्तियाँ’ रवींद्र केलेकर के दो प्रसंगों का संग्रह है। पहला प्रसंग ‘गिन्नी का सोना’ आदर्श और व्यावहारिकता के अंतर को समझाता है। दूसरा प्रसंग ‘झेन की देन’ जापान की ‘टी-सेरेमनी’ के माध्यम से बताता है कि तनाव भरे जीवन में वर्तमान में जीना कितना जरूरी है।

पाठ का सार

Iगिन्नी का सोना

शुद्ध सोना और गिन्नी का सोना अलग होते हैं। गिन्नी के सोने में थोड़ा ताँबा मिलाया जाता है, इसलिए वह अधिक चमकता और मजबूत होता है। शुद्ध आदर्श भी शुद्ध सोने जैसे होते हैं। कुछ लोग उनमें व्यावहारिकता का ताँबा मिलाकर उन्हें चलाते हैं, जिन्हें ‘प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट’ कहा जाता है।

गांधीजी आदर्शों को व्यावहारिकता के स्तर पर नहीं उतरने देते थे, बल्कि व्यावहारिकता को आदर्शों के स्तर पर चढ़ाते थे। वे सोने में ताँबा नहीं, ताँबे में सोना मिलाकर उसकी कीमत बढ़ाते थे। समाज के पास जो शाश्वत मूल्य हैं, वे आदर्शवादी लोगों की देन हैं।

IIझेन की देन

लेखक के जापानी मित्र ने बताया कि जापान के अस्सी प्रतिशत लोग मनोरुग्ण हैं, क्योंकि उनके जीवन की रफ़्तार बहुत बढ़ गई है। वे अमेरिका से प्रतिस्पर्धा में एक महीने का काम एक दिन में करना चाहते हैं।

मित्र लेखक को ‘टी-सेरेमनी’ (चा-नो-यू) में ले गए। वहाँ शांत वातावरण में चाजीन ने गरिमापूर्ण ढंग से चाय बनाई। तीन मित्रों ने डेढ़ घंटे तक धीरे-धीरे चाय की चुस्कियाँ लीं। लेखक का दिमाग धीमा होते-होते शांत हो गया। उन्हें लगा कि वे अनंतकाल में जी रहे हैं। उन्होंने समझा कि भूत और भविष्य मिथ्या हैं, केवल वर्तमान ही सत्य है।

मौखिक — एक-दो पंक्तियों में उत्तर

1शुद्ध सोना और गिन्नी का सोना अलग क्यों होता है?

गिन्नी के सोने में थोड़ा-सा ताँबा मिलाया जाता है, जिससे वह अधिक चमकीला और मजबूत हो जाता है। शुद्ध सोने में कोई मिलावट नहीं होती।

2प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट किसे कहते हैं?

जो लोग शुद्ध आदर्शों में व्यावहारिकता मिलाकर उन्हें जीवन में चलाते हैं, उन्हें प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट (व्यावहारिक आदर्शवादी) कहते हैं।

3पाठ के संदर्भ में शुद्ध आदर्श क्या है?

शुद्ध आदर्श वे सिद्धांत हैं जिनमें स्वार्थ या व्यावहारिकता की कोई मिलावट नहीं होती; जैसे — सत्य, अहिंसा और त्याग।

4लेखक ने जापानियों के दिमाग में ‘स्पीड’ का इंजन लगने की बात क्यों कही है?

जापानी लोग अमेरिका से प्रतिस्पर्धा में एक महीने का काम एक दिन में करना चाहते हैं। उनका दिमाग हजार गुना तेज रफ़्तार से दौड़ता है, इसलिए लेखक ने ‘स्पीड’ का इंजन लगने की बात कही है।

5जापानी में चाय पीने की विधि को क्या कहते हैं?

जापानी में चाय पीने की इस विधि को ‘चा-नो-यू’ कहते हैं।

6जापान में जहाँ चाय पिलाई जाती है, उस स्थान की क्या विशेषता है?

वह छह मंजिली इमारत की छत पर बनी एक सुंदर पर्णकुटी थी। उसकी दीवारें दफ़्ती की और जमीन तातामी (चटाई) की थी। बाहर पानी भरा मिट्टी का बरतन था। वहाँ बहुत शांति थी।

लिखित (क) — 25-30 शब्दों में उत्तर

1शुद्ध आदर्श की तुलना सोने से और व्यावहारिकता की तुलना ताँबे से क्यों की गई है?

शुद्ध आदर्श सोने की तरह मूल्यवान और खरे होते हैं। व्यावहारिकता ताँबे की तरह कम मूल्य की, पर मजबूती देने वाली है। जैसे ताँबा सोने को चमक और मजबूती देता है पर उसकी शुद्धता घटाता है, वैसे ही व्यावहारिकता आदर्श को चलने योग्य बनाती है पर उसकी शुद्धता कम करती है।

2चाजीन ने कौन-सी क्रियाएँ गरिमापूर्ण ढंग से पूरी कीं?

चाजीन ने कमर झुकाकर प्रणाम किया, ‘दो...झो...’ कहकर स्वागत किया और बैठने की जगह दिखाई। फिर अँगीठी सुलगाई, उस पर चायदानी रखी, बगल के कमरे से बरतन लाकर तौलिये से साफ़ किए और चाय प्यालों में भरी। ये सभी क्रियाएँ उसने बड़े गरिमापूर्ण ढंग से कीं।

3‘टी-सेरेमनी’ में कितने आदमियों को प्रवेश दिया जाता था और क्यों?

‘टी-सेरेमनी’ में तीन से अधिक आदमियों को प्रवेश नहीं दिया जाता था, क्योंकि इस विधि में शांति मुख्य बात होती है। अधिक लोग होने से शांति भंग हो जाती।

4चाय पीने के बाद लेखक ने स्वयं में क्या परिवर्तन महसूस किया?

चाय पीने के बाद लेखक के दिमाग की रफ़्तार धीरे-धीरे धीमी होकर बंद-सी हो गई। उन्हें लगा कि वे अनंतकाल में जी रहे हैं। उन्हें सन्नाटा भी सुनाई देने लगा। उन्होंने वर्तमान में जीने का आनंद अनुभव किया।

लिखित (ख) — 50-60 शब्दों में उत्तर

1गांधीजी में नेतृत्व की अद्भुत क्षमता थी; उदाहरण सहित इस बात की पुष्टि कीजिए।

गांधीजी सत्य और अहिंसा जैसे आदर्शों पर स्वयं चलते थे और करोड़ों लोगों को अपने साथ चला लेते थे। उनके एक आह्वान पर असहयोग आंदोलन, दांडी यात्रा (नमक सत्याग्रह) और भारत छोड़ो आंदोलन में देश भर के लोग जुड़ गए। उन्होंने व्यावहारिकता को आदर्शों के स्तर तक उठाया। यह उनकी अद्भुत नेतृत्व क्षमता का प्रमाण है।

2आपके विचार से कौन-से ऐसे मूल्य हैं जो शाश्वत हैं? वर्तमान समय में इन मूल्यों की प्रासंगिकता स्पष्ट कीजिए।

सत्य, अहिंसा, ईमानदारी, दया, परोपकार, त्याग और सहनशीलता शाश्वत मूल्य हैं। आज समाज में स्वार्थ, भ्रष्टाचार, हिंसा और प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है। ऐसे समय में ये मूल्य ही आपसी विश्वास, शांति और भाईचारा बनाए रख सकते हैं। इसलिए आज भी ये पूरी तरह प्रासंगिक हैं।

3अपने जीवन की किसी ऐसी घटना का उल्लेख कीजिए जब — (1) शुद्ध आदर्श से आपको हानि-लाभ हुआ हो; (2) शुद्ध आदर्श में व्यावहारिकता का पुट देने से लाभ हुआ हो।

नमूना उत्तर : (1) एक बार परीक्षा में मेरे मित्र ने नकल करवाने को कहा। मैंने मना कर दिया। वह नाराज हो गया, यह हानि थी। पर शिक्षक ने मेरी ईमानदारी की प्रशंसा की, यह लाभ था।

(2) मैं हमेशा सच बोलता हूँ। एक बार दादी बीमार थीं और उन्होंने अपनी रिपोर्ट के बारे में पूछा। मैंने उन्हें डराने के बजाय सच को नरमी से बताया और हिम्मत दी। इससे वे घबराईं नहीं और जल्दी ठीक हो गईं।

4‘शुद्ध सोने में ताँबे की मिलावट या ताँबे में सोना’, गांधीजी के आदर्श और व्यवहार के संदर्भ में यह बात किस तरह झलकती है? स्पष्ट कीजिए।

आम ‘प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट’ शुद्ध आदर्श (सोने) में व्यावहारिकता (ताँबा) मिलाकर आदर्श को नीचे ले आते हैं। गांधीजी इसके उलट करते थे। वे व्यावहारिकता (ताँबे) में आदर्श (सोना) मिलाकर उसे ऊँचा उठाते थे। उन्होंने आदर्शों से कभी समझौता नहीं किया। इसीलिए उनके जीवन में सोना यानी आदर्श हमेशा आगे रहा।

5‘गिन्नी का सोना’ के संदर्भ में स्पष्ट कीजिए कि ‘आदर्शवादिता’ और ‘व्यावहारिकता’ इनमें से जीवन में किसका महत्त्व है?

जीवन में दोनों का महत्त्व है, पर आदर्शवादिता अधिक महत्त्वपूर्ण है। केवल व्यावहारिक व्यक्ति ‘गिरगिट’ की तरह स्वार्थ के लिए रंग बदलता रहता है। ऐसे लोग समाज को नीचे गिराते हैं। आदर्शवादी लोग स्वयं ऊपर उठते हैं और दूसरों को भी उठाते हैं। व्यावहारिकता तभी अच्छी है जब वह आदर्शों के अधीन रहे।

6लेखक के मित्र ने मानसिक रोग के क्या-क्या कारण बताए? आप इन कारणों से कहाँ तक सहमत हैं?
  • जीवन की रफ़्तार बहुत बढ़ गई है; लोग चलते नहीं, दौड़ते हैं; बोलते नहीं, बकते हैं।
  • अमेरिका से प्रतिस्पर्धा में एक महीने का काम एक दिन में करने की होड़।
  • दिमाग पर लगातार तनाव, जिससे उसका ‘इंजन’ टूट जाता है।
  • अकेले में भी अपने आप से बड़बड़ाते रहना।
  • सहमति : मैं इन कारणों से पूरी तरह सहमत हूँ। आज भारत में भी प्रतिस्पर्धा और भागदौड़ के कारण तनाव और मानसिक रोग बढ़ रहे हैं।
7लेखक के अनुसार सत्य केवल वर्तमान है, उसी में जीना चाहिए। लेखक ने ऐसा क्यों कहा होगा? स्पष्ट कीजिए।

भूतकाल बीत चुका है और भविष्य अभी आया नहीं है। दोनों ही मिथ्या हैं। हम बीते दिनों की यादों और भविष्य के सपनों में उलझकर वर्तमान को खो देते हैं और तनाव में रहते हैं। जो क्षण हमारे सामने है, वही सत्य है। उसमें पूरी तरह जीने से ही शांति और आनंद मिलता है।

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लिखित (ग) — आशय स्पष्ट कीजिए

1‘समाज के पास अगर शाश्वत मूल्यों जैसा कुछ है ...’

समाज में सत्य, अहिंसा, त्याग जैसे जो स्थायी मूल्य हैं, वे आदर्शवादी लोगों की देन हैं। व्यवहारवादी लोगों ने तो अपने लाभ के लिए समाज को नीचे ही गिराया है।

2‘जब व्यावहारिकता का बखान होने लगता है ...’

जब लोग व्यावहारिकता की प्रशंसा करने लगते हैं, तो प्रैक्टिकल आइडियालिस्ट धीरे-धीरे आदर्शों को छोड़ देते हैं और केवल अपनी व्यावहारिक सूझबूझ (लाभ-हानि) पर चलने लगते हैं। सोना पीछे और ताँबा आगे आ जाता है।

3‘हमारे जीवन की रफ़्तार बढ़ गई है ...’

आज का मनुष्य हर काम जल्दी में करता है। वह शांति से चलने के बजाय दौड़ता है और सोच-समझकर बोलने के बजाय बकता है। तनाव इतना है कि अकेले में भी वह अपने आप से बड़बड़ाता रहता है।

4‘सभी क्रियाएँ इतनी गरिमापूर्ण ढंग से कीं ...’

चाजीन ने चाय बनाने की हर क्रिया इतनी शांति, सलीके और सुंदरता से की कि उसकी हर मुद्रा से संगीत (जयजयवंती राग) के मधुर सुर गूँजते-से लगते थे।

भाषा अध्ययन

1शब्दों का वाक्य में प्रयोग
शब्दवाक्य
व्यावहारिकताजीवन में आदर्श के साथ व्यावहारिकता भी जरूरी है।
आदर्शगांधीजी का जीवन हमारे लिए आदर्श है।
सूझबूझचालक की सूझबूझ से बड़ी दुर्घटना टल गई।
विलक्षणआइंस्टीन विलक्षण प्रतिभा के धनी थे।
शाश्वतसत्य और प्रेम शाश्वत मूल्य हैं।
2द्वंद्व समास का विग्रह
समस्त पदविग्रह
माता-पितामाता और पिता
पाप-पुण्यपाप और पुण्य
सुख-दुखसुख और दुख
रात-दिनरात और दिन
अन्न-जलअन्न और जल
घर-बाहरघर और बाहर
देश-विदेशदेश और विदेश
3विशेषण से भाववाचक संज्ञा

सफल — सफलताविलक्षण — विलक्षणताव्यावहारिक — व्यावहारिकतासजग — सजगताआदर्शवादी — आदर्शवादिताशुद्ध — शुद्धता

4अनेकार्थी शब्दों का वाक्यों में प्रयोग
शब्दवाक्य
उत्तर(जवाब) उसने प्रश्न का सही उत्तर दिया। (दिशा) हिमालय भारत के उत्तर में है।
कर(हाथ) उसने कर जोड़कर प्रणाम किया। (टैक्स) हमें समय पर कर चुकाना चाहिए।
अंक(संख्या/नंबर) मुझे गणित में सौ अंक मिले। (गोद) माँ ने बच्चे को अंक में भर लिया।
नग(रत्न) अँगूठी में हीरे का नग जड़ा है। (पर्वत) हिमालय को नगराज कहते हैं।
5संयुक्त वाक्य बनाइए
  1. अँगीठी सुलगाई और उस पर चायदानी रखी।
  2. चाय तैयार हुई और उसने वह प्यालों में भरी।
  3. बगल के कमरे से जाकर कुछ बरतन ले आया और तौलिये से बरतन साफ़ किए।
6मिश्र वाक्य बनाइए
  1. यह चाय पीने की एक विधि है, जिसे जापानी में चा-नो-यू कहते हैं।
  2. बाहर बेढब-सा एक मिट्टी का बरतन था, जिसमें पानी भरा हुआ था।
  3. जैसे ही चाय तैयार हुई, उसने वह प्यालों में भरकर हमारे सामने रख दी।

योग्यता विस्तार और परियोजना कार्य

★भारत में चाय की पैदावार वाले प्रमुख स्थान
  • असम : सबसे अधिक चाय उत्पादन; तेज स्वाद और गहरा रंग।
  • दार्जिलिंग (पश्चिम बंगाल) : ऊँचे पहाड़ों की चाय; विशेष सुगंध के लिए विश्व-प्रसिद्ध।
  • नीलगिरि (तमिलनाडु) और केरल : दक्षिण भारत की हल्की और सुगंधित चाय।
  • हिमाचल प्रदेश (काँगड़ा) और त्रिपुरा : अन्य उत्पादक क्षेत्र।
  • चाय के लिए गर्म-नम जलवायु, अधिक वर्षा और ढलान वाली जमीन चाहिए, जहाँ पानी न रुके।

शब्दार्थ

शब्दअर्थ
व्यावहारिकतासमय और अवसर देखकर काम करने की सूझ
प्रैक्टिकल आइडियालिस्टव्यावहारिक आदर्शवादी
बखानवर्णन करना
सूझबूझकाम करने की समझ
स्तरश्रेणी
के स्तर परकी श्रेणी में
सजगसचेत
शाश्वतजो सदैव एक-सा रहे
शुद्ध सोना24 कैरेट का बिना मिलावट का सोना
गिन्नी का सोना22 कैरेट का सोना, जिसमें ताँबा मिला हो
मनोरुग्णमानसिक रोग से पीड़ित
प्रतिस्पर्धाहोड़
स्पीडगति
टी-सेरेमनीजापान में चाय पीने का विशेष आयोजन
चाजीनजापानी विधि से चाय पिलाने वाला
गरिमापूर्णसलीके से
भंगिमामुद्रा
जयजयवंतीएक राग का नाम
खदबदानाउबलना
उलझनअसमंजस
अनंतकालवह काल जिसका अंत न हो
सन्नाटाखामोशी
मिथ्याभ्रम