5. तोप
वीरेन डंगवाल की कविता — सार, प्रश्न-उत्तर, भाव स्पष्टीकरण और गद्य रूपांतरण. NCERT हिंदी स्पर्श (भाग 2).
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पाठ का परिचय : ‘तोप’ वीरेन डंगवाल की कविता है। कानपुर के कंपनी बाग के मुहाने पर रखी 1857 की तोप विरासत में मिली है। यह तोप अंग्रेजों के अत्याचार की याद दिलाती है और बताती है कि कितनी भी बड़ी ताकत हो, एक दिन उसका अंत अवश्य होता है।
कविता का सार
कंपनी बाग के प्रवेश द्वार पर 1857 की एक तोप रखी है। बाग की तरह इस तोप की भी सँभाल होती है। साल में दो बार इसे चमकाया जाता है। सुबह-शाम बाग में आने वाले सैलानियों को यह तोप बताती है कि कभी वह बहुत ताकतवर थी। उसने अच्छे-अच्छे वीरों के चिथड़े उड़ा दिए थे।
अब यह तोप शांत पड़ी है। छोटे लड़के इस पर घुड़सवारी करते हैं और चिड़ियाँ इस पर बैठकर गपशप करती हैं। कभी-कभी गौरैयाँ इसके भीतर घुस जाती हैं। चिड़ियाँ मानो बताती हैं कि तोप कितनी भी बड़ी हो, एक दिन उसका मुँह बंद होना ही है।
कविता का पूरा पाठ NCERT पाठ्यपुस्तक ‘स्पर्श’ (भाग 2) में पढ़ें।
प्रश्न-अभ्यास (क) — निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए
विरासत में मिली चीजें हमें अपने इतिहास और पूर्वजों की याद दिलाती हैं। वे हमारी संस्कृति और संघर्ष की गवाह होती हैं। उनसे आने वाली पीढ़ियाँ सीख लेती हैं। इसलिए उनकी बड़ी सँभाल की जाती है।
- यह तोप 1857 की है और कानपुर के कंपनी बाग के मुहाने पर रखी है।
- अंग्रेजों ने इससे अनेक भारतीय वीरों को मारा था।
- आज यह विरासत के रूप में रखी है और साल में दो बार चमकाई जाती है।
- अब बच्चे इस पर खेलते हैं और चिड़ियाँ इस पर बैठकर गपशप करती हैं।
तोप सीख देती है कि अत्याचार और शक्ति का घमंड हमेशा नहीं रहता। कितनी भी बड़ी ताकत हो, एक दिन उसका अंत अवश्य होता है। यह हमें स्वतंत्रता संग्राम के वीरों का बलिदान याद रखने और आजादी की रक्षा करने की सीख भी देती है।
ये दो अवसर हैं — 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) और 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस)। इन राष्ट्रीय पर्वों पर विरासत की चीजों को सजाया और चमकाया जाता है।
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प्रश्न-अभ्यास (ख) — भाव स्पष्ट कीजिए
जो तोप कभी बहुत भयानक थी, आज उसका कोई डर नहीं रहा। अब छोटे बच्चे उस पर घोड़े की तरह सवारी करते हैं। जब बच्चे नहीं होते, तब चिड़ियाँ उस पर बैठकर गपशप करती हैं। तोप अब केवल शोभा की वस्तु रह गई है।
चिड़ियाँ मानो बताती हैं कि शक्ति कितनी भी बड़ी हो, एक दिन उसका अंत होता ही है। अत्याचार और दमन हमेशा नहीं चलते। तोप का बंद मुँह इसी सच्चाई का प्रमाण है।
तोप अपनी पुरानी ताकत का बखान करती है। 1857 में उसने अनेक वीर स्वतंत्रता सेनानियों को मारकर उनके चिथड़े उड़ा दिए थे। यह पंक्ति अंग्रेजों के अत्याचार की याद दिलाती है।
भाषा अध्ययन
‘धर रखी गई है यह 1857 की तोप’ — यहाँ देशज शब्द ‘धर’ के तीन अर्थ निकलते हैं : रखना (तोप बाग में रखी गई है), धरोहर (यह हमारी विरासत है) और संचय (इतिहास की याद के रूप में सहेजी गई है)।
कानपुर के कंपनी बाग के मुहाने पर 1857 की एक तोप रखी हुई है। यह हमें विरासत में मिली है। जैसे बाग की देखभाल होती है, वैसे ही इस तोप की भी देखभाल होती है। साल में दो बार इसे चमकाया जाता है।
सुबह-शाम बाग में घूमने आने वाले लोगों को यह तोप अपनी कहानी सुनाती है कि अपने समय में यह बहुत ताकतवर थी और इसने बड़े-बड़े वीरों को मार डाला था। आज यह शांत है। बच्चे इस पर घुड़सवारी करते हैं और चिड़ियाँ इस पर बैठकर बातें करती हैं। कभी-कभी गौरैयाँ इसके अंदर भी घुस जाती हैं। मानो वे बताती हैं कि तोप कितनी भी बड़ी हो, एक दिन उसका मुँह बंद होना ही है।
योग्यता विस्तार और परियोजना कार्य
- पेड़-पौधे शुद्ध हवा देते हैं और प्रदूषण कम करते हैं।
- लोगों को टहलने, व्यायाम करने और आराम करने की जगह मिलती है।
- बच्चों को खेलने का सुरक्षित स्थान मिलता है।
- भीड़-भाड़ और तनाव से राहत मिलती है।
स्वतंत्रता सेनानियों की गाथाओं वाली पुस्तक पुस्तकालय से लेकर पढ़ें और कक्षा में सुनाएँ।
शब्दार्थ
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| मुहाने | प्रवेश द्वार पर |
| धर रखी | रखी गई |
| सम्हाल | देखभाल |
| विरासत | पूर्व पीढ़ियों से प्राप्त वस्तुएँ |
| सैलानी | दर्शनीय स्थलों पर आने वाले यात्री |
| सूरमा | वीर |
| धज्जे | चिथड़े-चिथड़े करना |
| फ़ारिग | मुक्त, खाली |
| कंपनी बाग | ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा कानपुर में बनवाया गया बाग |