कक्षा 10 हिंदी · स्पर्श भाग 2 · कैफ़ी आज़मी · पद्य खंड

6. कर चले हम फ़िदा

कैफ़ी आज़मी का देशभक्ति गीत — सार, प्रश्न-उत्तर, भाव स्पष्टीकरण और विशिष्ट प्रयोग. NCERT हिंदी स्पर्श (भाग 2).

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पाठ का परिचय : ‘कर चले हम फ़िदा’ कैफ़ी आज़मी का गीत है। इसे 1962 के भारत-चीन युद्ध की पृष्ठभूमि पर बनी फ़िल्म ‘हकीकत’ के लिए लिखा गया था। इसमें देश के लिए प्राण न्योछावर करने वाले सैनिक अपने देशवासियों से कहते हैं कि अब देश की रक्षा का भार तुम्हारे हाथों में है।

गीत का सार

★गीत संक्षेप में

घायल सैनिक कहते हैं कि हमने देश के लिए अपना तन-मन न्योछावर कर दिया है, अब देश तुम्हारे हवाले है। हमारी साँसें रुकती गईं, नाड़ी जमती गई, फिर भी हमने कदम आगे बढ़ाए रखे। हमारे सिर कट गए, पर हमने हिमालय का सिर (देश का गौरव) झुकने नहीं दिया।

जीने के अवसर बहुत आते हैं, पर देश के लिए जान देने का अवसर रोज नहीं आता। जो जवानी देश के लिए खून में नहीं नहाती, वह व्यर्थ है। आज धरती दुलहन की तरह है। बलिदान का यह रास्ता कभी सूना न हो, नए-नए वीर इस पर चलते रहें।

सैनिक कहते हैं कि अपने खून से धरती पर ऐसी रेखा खींच दो कि कोई रावण (शत्रु) इस ओर न आ सके। जो हाथ भारत माता (सीता) के आँचल की ओर उठे, उसे तोड़ दो। अब तुम ही राम हो और तुम ही लक्ष्मण।

प्रश्न-अभ्यास (क) — निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए

1क्या इस गीत की कोई ऐतिहासिक पृष्ठभूमि है?

हाँ, इस गीत की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि है। यह 1962 के भारत-चीन युद्ध पर आधारित फ़िल्म ‘हकीकत’ के लिए लिखा गया था। इसमें उस युद्ध में शहीद हुए भारतीय सैनिकों की भावनाएँ व्यक्त हुई हैं।

2‘सर हिमालय का हमने न झुकने दिया’, इस पंक्ति में हिमालय किस बात का प्रतीक है?

यहाँ हिमालय भारत के मान-सम्मान और गौरव का प्रतीक है। सैनिकों ने अपने प्राण दे दिए, पर देश के सम्मान को झुकने नहीं दिया।

3इस गीत में धरती को दुलहन क्यों कहा गया है?

युद्ध में शहीदों के खून से धरती लाल हो गई है, जैसे दुलहन लाल जोड़ा पहनती है। जैसे दुलहन की रक्षा की जाती है, वैसे ही देश की धरती की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है। इसलिए धरती को दुलहन कहा गया है।

4गीत में ऐसी क्या खास बात होती है कि वे जीवन भर याद रह जाते हैं?
  • गीतों में लय, ताल और संगीत होता है।
  • उनके शब्द सरल और भावपूर्ण होते हैं।
  • वे सीधे दिल को छूते हैं और भावनाएँ जगाते हैं।
  • बार-बार गाने और सुनने से वे आसानी से याद हो जाते हैं।
5कवि ने ‘साथियो’ संबोधन का प्रयोग किसके लिए किया है?

कवि ने ‘साथियो’ संबोधन देशवासियों और अन्य सैनिकों के लिए किया है, जिन्हें अब देश की रक्षा का भार सौंपा जा रहा है।

6कवि ने इस कविता में किस काफ़िले को आगे बढ़ाते रहने की बात कही है?

कवि ने देश के लिए बलिदान देने वाले वीरों के काफ़िले को आगे बढ़ाते रहने की बात कही है। बलिदान का यह मार्ग कभी सूना नहीं होना चाहिए।

7इस गीत में ‘सर पर कफ़न बाँधना’ किस ओर संकेत करता है?

‘सर पर कफ़न बाँधना’ का अर्थ है — मृत्यु की परवाह किए बिना हर समय बलिदान के लिए तैयार रहना। यह देश के लिए प्राण देने की तत्परता की ओर संकेत करता है।

8इस कविता का प्रतिपाद्य अपने शब्दों में लिखिए।

यह गीत सैनिकों के अदम्य साहस, देशप्रेम और बलिदान को दर्शाता है। शहीद होते सैनिक देशवासियों से कहते हैं कि हमने देश का सम्मान नहीं झुकने दिया, अब तुम इसकी रक्षा करो। गीत देशवासियों को हमेशा देश के लिए त्याग और बलिदान करने को तैयार रहने की प्रेरणा देता है।

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प्रश्न-अभ्यास (ख) — भाव स्पष्ट कीजिए

1‘साँस थमती गई, नब्ज़ जमती गई ...’

युद्ध में घायल सैनिकों की साँसें रुकने लगीं और बर्फीली ठंड में नाड़ियाँ जमने लगीं। फिर भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और शत्रु की ओर बढ़ते रहे। यह उनके अदम्य साहस को दर्शाता है।

2‘खींच दो अपने खूँ से ज़मीं पर लकीर ...’

सैनिक देशवासियों से कहते हैं कि अपने खून से धरती पर ऐसी सीमा-रेखा खींच दो कि कोई शत्रु (रावण) देश में घुस न सके। देश की सीमाओं की रक्षा प्राण देकर भी करनी चाहिए।

3‘छू न पाए सीता का दामन कोई ...’

यहाँ सीता भारत माता की प्रतीक है। सैनिक कहते हैं कि कोई शत्रु भारत माता के सम्मान को छू भी न सके। देश की रक्षा के लिए अब तुम्हें ही राम और लक्ष्मण बनना है।

भाषा अध्ययन

1विशिष्ट प्रयोगों का आशय और वाक्य-प्रयोग
प्रयोगआशयवाक्य
कट गए सरप्राणों का बलिदान हो गयादेश की रक्षा में अनेक वीरों के सर कट गए।
नब्ज़ जमती गईशरीर सुन्न होता गया, मृत्यु निकट आईबर्फीली चोटियों पर सैनिकों की नब्ज़ जमती गई, पर वे डटे रहे।
जान देने की रुतप्राण न्योछावर करने का अवसरदेश पर संकट आया तो वीरों ने इसे जान देने की रुत माना।
हाथ उठने लगेआक्रमण या अपमान करने का प्रयास होने लगेजब देश पर हाथ उठने लगे, तब सेना ने करारा जवाब दिया।

संबोधन में बहुवचन शब्द पर अनुस्वार नहीं लगता; जैसे — साथियो, भाइयो, बहिनो, देवियो, सज्जनो।

योग्यता विस्तार और परियोजना कार्य

शब्दार्थ

शब्दअर्थ
फ़िदान्योछावर
हवालेसौंपना
नब्ज़नाड़ी
रुतमौसम
हुस्नसुंदरता
रुस्वाबदनाम
खूँखून
कुर्बानियाँबलिदान
काफ़िलेयात्रियों का समूह
फ़तहजीत
जश्नखुशी मनाना
ज़मींज़मीन
लकीररेखा