कक्षा 5 हिंदी · वीणा · CBSE

11. हमारे ये कलामंदिर

पाठ ‘हमारे ये कलामंदिर’ (अजंता-एलोरा) के सभी अभ्यास — वर्ग पहेली, मानचित्र और प्राकृतिक रंग — सरल भाषा में। NCERT वीणा, कक्षा 5.

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पाठ का सार : दशहरे की छुट्टियों में निशा अपनी मौसी के साथ महाराष्ट्र की अजंता और एलोरा की गुफाएँ देखने गई। वे रेलगाड़ी से छत्रपति संभाजीनगर पहुँचीं। अजंता में एक पहाड़ी पर उनतीस गुफाएँ हैं। गुफाओं की दीवारों पर गौतम बुद्ध के जीवन और पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों के सुंदर चित्र बने हैं। ये चित्र दो हज़ार वर्ष पुराने हैं, फिर भी इनके रंग फीके नहीं पड़े, क्योंकि रंग पत्तों, जड़ी-बूटियों और फूलों से बनाए गए थे। एलोरा में पहाड़ों को काटकर लगभग तीस मंदिर बनाए गए हैं। इनमें बौद्ध, हिंदू और जैन धर्म से जुड़ी मूर्तियाँ हैं। वहाँ का कैलाश मंदिर एक ही चट्टान को ऊपर से तराशकर बनाया गया है।

बातचीत के लिए

1आपकी छुट्टियाँ कब-कब होती हैं? आप छुट्टियों में कहाँ-कहाँ जाते हैं?

हमारी छुट्टियाँ गरमी में (मई-जून), दिवाली पर और त्योहारों पर होती हैं। गरमी की छुट्टियों में मैं नानी के गाँव जाता/जाती हूँ। कभी-कभी हम परिवार के साथ किसी पर्यटन स्थल पर घूमने भी जाते हैं।

2आपके घर और घर के आस-पास कौन-कौन से चित्र बने या लगे हैं?

हमारे घर में भगवान के चित्र, परिवार के फ़ोटो और प्राकृतिक दृश्यों के चित्र लगे हैं। आँगन में रंगोली बनी है। विद्यालय की दीवारों पर महापुरुषों के चित्र और ‘पेड़ बचाओ’ जैसे संदेश वाले चित्र बने हैं।

3आपके घर में कौन-कौन और कहाँ-कहाँ चित्रकारी करते हैं?
  • माँ और दीदी त्योहारों पर धरती पर रंगोली बनाती हैं।
  • दादी दीवार पर शुभ चिह्न बनाती हैं।
  • मैं कागज़ पर चित्र बनाता/बनाती हूँ।
  • दीवाली पर हम मिट्टी के दीयों पर रंग करते हैं।
  • बुआ कपड़ों पर कढ़ाई करके सुंदर डिज़ाइन बनाती हैं।
4गुफाओं के चित्र देखते ही निशा के मुँह से ‘वाह!’ क्यों निकला? आपके मुँह से कब-कब ‘वाह!’ निकलता है?

गुफाओं के चित्र अत्यंत सुंदर और सजीव थे। उनमें सुंदर रंग भरे थे। इसलिए निशा के मुँह से ‘वाह!’ निकला।

जब मैं कोई सुंदर दृश्य, इंद्रधनुष, जादू का खेल या स्वादिष्ट पकवान देखता/देखती हूँ, तब मेरे मुँह से ‘वाह!’ निकलता है।

पाठ से

1निशा, अजंता और एलोरा जाने के लिए क्यों उत्साहित थी?

(ख) उसने इन गुफाओं के बारे में पुस्तकों में पढ़ा था।

2निशा को अजंता और एलोरा देखकर कैसा लगा?

(ख) उसे आश्चर्य हुआ।

3अजंता की गुफाओं में बने रंग इतने वर्षों बाद भी क्यों फीके नहीं पड़े थे?

(ग) रंग, फूलों जैसी प्राकृतिक सामग्रियों से बनाए गए थे।

4यात्रा से लौटने के बाद भी निशा को वे कलाकृतियाँ बार-बार क्यों याद आ रही थीं?

(घ) गुफाओं की सभी कलाकृतियाँ बहुत आकर्षक थीं।

सोचिए और लिखिए

1अजंता में निशा ने क्या-क्या देखा?

अजंता में निशा ने एक छोटी नदी, उसमें पड़े बड़े शिलाखंड और पहाड़ी पर एक पंक्ति में बनी उनतीस गुफाएँ देखीं। गुफा के नीचे पानी से भरा कुंड था। घाटी में रंग-बिरंगे फूल खिले थे। गुफाओं की दीवारों पर गौतम बुद्ध के जीवन, पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों और स्त्रियों के सुंदर चित्र थे। पत्थरों को तराशकर बनाई गई मूर्तियाँ भी थीं।

2कैलाश मंदिर के बारे में आपको कौन-सी बात सबसे अधिक आश्चर्यजनक लगी?

पूरा कैलाश मंदिर एक ही चट्टान से बना है। उसे एक ऊँचे पहाड़ को ऊपर की ओर से तराशकर बनाया गया है। यह बात मुझे सबसे अधिक आश्चर्यजनक लगी।

3छोटी और बड़ी गुफाओं के बारे में क्या बताया गया है?

अजंता की कुछ गुफाएँ अत्यंत लंबी-चौड़ी थीं और कुछ छोटी। ये सभी गुफाएँ पहाड़ों को ही काटकर बनाई गई थीं। इनमें बनी मूर्तियाँ भी पत्थरों को तराशकर बनाई गई थीं।

4क्या कारण है कि अजंता की गुफाओं का मुँह पूर्व दिशा में बनाया गया है?

सूर्य पूर्व दिशा में उगता है। गुफाओं का मुँह पूर्व की ओर होने से सुबह के सूरज की किरणें सीधे गुफाओं के अंदर पहुँचती हैं। इससे गुफाओं में उजाला रहता है और चित्र बनाने व देखने में सुविधा होती है।

5अजंता और एलोरा तक पहुँचने के लिए यातायात के कौन-कौन से साधनों का प्रयोग कर सकते हैं?

हम रेलगाड़ी या हवाई जहाज़ से छत्रपति संभाजीनगर पहुँच सकते हैं। वहाँ से बस, कार या टैक्सी द्वारा अजंता और एलोरा जा सकते हैं।

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अनुमान एवं कल्पना

1यदि अजंता की दीवारों के चित्र बोल सकते तो वे हमें क्या कहानियाँ सुनाते?

वे गौतम बुद्ध के जीवन की कहानियाँ सुनाते — कैसे राजकुमार सिद्धार्थ ने घर छोड़ा, तप किया और ज्ञान पाकर बुद्ध बने। वे उन कलाकारों की कहानी भी सुनाते जिन्होंने दीये की रोशनी में बरसों मेहनत करके ये चित्र बनाए।

2यदि आपको अजंता की गुफाओं में एक नया चित्र बनाने का अवसर मिले तो आप क्या बनाएँगे और क्यों?

मैं गुफा के बाहर बहती नदी, हरी-भरी घाटी और रंग-बिरंगे फूलों का चित्र बनाऊँगा/बनाऊँगी। मैं चाहूँगा/चाहूँगी कि आने वाले लोग देखें कि उस समय वहाँ की प्रकृति कितनी सुंदर थी।

भाषा की बात

1शब्दों को उनके मिलते-जुलते अर्थों से मिलाइए —
शब्दअर्थ
शिलाखंडचट्टान, पत्थर
गुफाकंदरा, गुहा
कुंडतालाब, जलाशय
भिक्षुसंन्यासी, याचक
2पाठ में से दो शब्दों के मेल से बने अन्य शब्द खोजकर उनके अर्थ लिखिए।
शब्दमेलअर्थ
रेलगाड़ीरेल + गाड़ीपटरी पर चलने वाली गाड़ी
शिलाखंडशिला + खंडपत्थर का बड़ा टुकड़ा
प्रातःकालप्रातः + कालसुबह का समय
कलामंदिरकला + मंदिरकला का मंदिर, कलाकृतियों का स्थान
कलाकृतिकला + कृतिकला से बनी रचना
आश्चर्यचकितआश्चर्य + चकितबहुत हैरान
3इन शब्दों का प्रयोग करते हुए वाक्य लिखिए —
  • ज्यों का त्यों — दादाजी का पुराना घर आज भी ज्यों का त्यों है।
  • जैसे का तैसा — मैंने खिलौना जैसे का तैसा वापस रख दिया।
  • बिलकुल वैसा ही — मेरा बस्ता बिलकुल वैसा ही है जैसा मेरे मित्र का।
  • वैसा का वैसा — दस साल बाद भी मेरा विद्यालय वैसा का वैसा है।
  • जैसे थे वैसे ही — वर्षा के बाद भी किले की दीवारें जैसे थीं वैसी ही रहीं।
  • वास्तविक रूप में — संग्रहालय में पुराने सिक्के वास्तविक रूप में रखे हैं।
4इन वाक्यांशों से वाक्य बनाइए —
  • दंग रह जाना — ताजमहल की सुंदरता देखकर हम दंग रह गए।
  • ऐसा जैसे सपना हो — बर्फ़ से ढके पहाड़ों का दृश्य ऐसा था जैसे सपना हो।
  • प्रशंसा के योग्य होना — रीना की मेहनत प्रशंसा के योग्य है।
  • आँखें न हटा पाना — मोर का नाच देखकर मैं उससे आँखें न हटा पाया।
  • दिल को छू जाना — दादी की कहानी मेरे दिल को छू गई।
  • कल्पना से परे होना — अंतरिक्ष की विशालता हमारी कल्पना से परे है।
  • मन मोह लेना — बगीचे के रंग-बिरंगे फूलों ने सबका मन मोह लिया।
  • दृश्य भूल न पाना — समुद्र में डूबते सूरज का दृश्य मैं भूल न पाया।
  • दृष्टि थम जाना — कैलाश मंदिर पर पहुँचते ही मेरी दृष्टि थम गई।
5वर्ग पहेली में छिपे विशेषण शब्द खोजिए और उनका वाक्यों में प्रयोग कीजिए।

बाएँ से दाएँ — अद्भुत सुंदर कठिन सजीव विशाल रंग-बिरंगा

ऊपर से नीचे — बेजोड़ बड़ी मनोरम छोटी प्रसिद्ध

  • अजंता के चित्र अद्भुत हैं।
  • बगीचे में सुंदर फूल खिले हैं।
  • यह प्रश्न बहुत कठिन है।
  • गुफा के चित्र इतने सजीव हैं कि लगता है अभी बोल पड़ेंगे।
  • हाथी एक विशाल पशु है।
  • आसमान में रंग-बिरंगा इंद्रधनुष निकला।
  • एलोरा की कारीगरी बेजोड़ है।
  • अजंता के पास का दृश्य बहुत मनोरम है।
  • कैलाश मंदिर बहुत प्रसिद्ध है।

चित्र का वर्णन

•अजंता के प्रसिद्ध चित्र का वर्णन अपने शब्दों में कीजिए।

यह अजंता का प्रसिद्ध चित्र बोधिसत्व पद्मपाणि है। इसमें एक शांत और सुंदर व्यक्ति दिखाया गया है। उसके सिर पर सुंदर मुकुट है और गले में मोतियों की माला है। उसके हाथ में कमल का फूल है। उसकी आँखें आधी झुकी हुई हैं, जिससे उसके चेहरे पर शांति और करुणा का भाव दिखता है। चित्र में भूरे, पीले, लाल और हरे रंग भरे हैं। आस-पास और भी आकृतियाँ बनी हैं। इतने वर्षों बाद भी यह चित्र बहुत सजीव लगता है।

मानचित्र

•अजंता के मानचित्र की सहायता से प्रश्नों के उत्तर खोजिए —
  1. नदी का नाम — वाघोरा नदी
  2. मानचित्र में गुफाओं पर 1 से 30 तक अंक लिखे हैं। इसलिए कुल 30 गुफाएँ दिखाई गई हैं।
  3. मानचित्र में उत्तर दिशा का संकेत दिया गया है।
  4. “आप यहाँ हैं” का आशय है कि मानचित्र देखने वाला व्यक्ति इस समय उस स्थान पर खड़ा है। यहीं शटल सेवा (बस) का स्थान है।
  5. कुंड का नाम — सतकुंड

पाठ में उनतीस गुफाओं की बात कही गई है, पर मानचित्र पर 30 तक अंक हैं। गुफा संख्या 30 बाद में खोजी गई थी।

आइए मापें

रंगों का संसार

प्राकृतिक रंग ऐसे बनाए जा सकते हैं — हरा (पालक, मेहँदी, पुदीना या धनिया से), पीला (हल्दी से), लाल (चुकंदर से), नीला (कपड़ों में लगाने वाले नील से) और भूरा (कॉफ़ी या चाय की पत्तियों से)। अभिभावकों की सहायता से ये रंग बनाकर चित्र में भरिए।

पुस्तकालय से

धन्यवाद कार्ड

•अपने किसी संबंधी को धन्यवाद कार्ड लिखिए।

पूज्य मामाजी,
सादर प्रणाम।
आपने मेरे जन्मदिन पर मुझे कहानियों की सुंदर पुस्तकें भेजीं। इसके लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद। मैं रोज़ एक कहानी पढ़ता हूँ। मुझे ‘पंचतंत्र’ की कहानियाँ सबसे अच्छी लगीं। आप जल्दी हमारे घर आइए।
आपका भांजा,
रोहन

हमारी धरोहर

ऐतिहासिक स्मारक और कलाकृतियाँ हमारे देश की शोभा और गौरव हैं। इन्हें छूने, इनकी दीवारें खुरचने या इन पर कुछ लिखने से इन्हें हानि पहुँचती है। पर्यटन स्थलों पर घूमते समय हमें सावधानी रखनी चाहिए।

आपकी अभिव्यक्ति

•अपनी किसी रेल यात्रा का रोचक अनुभव लिखिए।

पिछली गरमी की छुट्टियों में मैं परिवार के साथ रेलगाड़ी से नागपुर गया। खिड़की के पास बैठकर मैंने खेत, नदियाँ, पुल और छोटे-छोटे गाँव देखे। हर स्टेशन पर चाय और समोसे वालों की आवाज़ें आ रही थीं। रात को मैं ऊपर की बर्थ पर सोया। रेलगाड़ी की छुक-छुक आवाज़ में मुझे बहुत अच्छी नींद आई। सुबह खिड़की से उगता सूरज देखना सबसे रोचक अनुभव था।

आपकी चित्रकारी