3. फूल और काँटा
अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ — कविता का भावार्थ और सभी प्रश्नों के सरल उत्तर. NCERT मल्हार (CBSE).
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कविता का केंद्रीय भाव : फूल और काँटा एक ही पौधे पर जन्म लेते हैं। उन्हें एक-सी चाँदनी, वर्षा और हवा मिलती है। फिर भी उनके स्वभाव अलग होते हैं। काँटा सबको चुभता है, जबकि फूल सबको सुख देता है। कवि कहते हैं कि ऊँचे कुल में जन्म लेने से कोई बड़ा नहीं बनता। मनुष्य अपने अच्छे गुणों और कर्मों से ही बड़ा बनता है।
कविता का भावार्थ
फूल और काँटा एक ही जगह जन्म लेते हैं। एक ही पौधा उन्हें पालता है। रात में चाँद दोनों पर एक-सी चाँदनी डालता है।
दोनों पर एक-सी वर्षा होती है और एक-सी हवा बहती है। फिर भी उनके ढंग (स्वभाव) एक जैसे नहीं होते।
काँटा किसी की उँगलियाँ छेद देता है। किसी के सुंदर वस्त्र फाड़ देता है। वह तितलियों के पंख काट देता है और भौंरे के काले शरीर को बेध देता है।
फूल तितलियों को अपनी गोद में बिठाता है। भौंरे को अपना अनूठा रस पिलाता है। अपनी सुगंध और सुंदर रंगों से सबका मन खिला देता है।
काँटा सबकी आँखों में खटकता है। फूल देवताओं के सिर पर शोभा पाता है। जिस व्यक्ति में बड़प्पन (अच्छे गुण) की कमी हो, उसे ऊँचे कुल की बड़ाई कोई काम नहीं देती।
मेरी समझ से
सही उत्तर :
काँटा उँगलियों को छेदता है और वस्त्र फाड़ देता है।
सही उत्तर :
फूल और काँटे एक ही पौधे पर उगते हैं, लेकिन उनके स्वभाव भिन्न होते हैं।
फूल और काँटे को समान देखभाल मिलती है फिर भी उनके रंग-ढंग अलग होते हैं।
सही उत्तर :
व्यक्ति के कार्यों के कारण ही लोग उसका सम्मान करते हैं।
सही उत्तर :
बड़प्पन व्यक्ति के गुणों, स्वभाव और कर्मों से पहचाना जाता है।
(ख) भाग की चर्चा कक्षा में अपने साथियों के साथ कीजिए।
पंक्तियों पर चर्चा
फूल और काँटे पर एक जैसी वर्षा और हवा पड़ती है। फिर भी दोनों का स्वभाव अलग है। इसी तरह एक ही घर में पले लोगों के स्वभाव भी अलग हो सकते हैं।
यदि किसी व्यक्ति में अच्छे गुण नहीं हैं, तो ऊँचे कुल का नाम उसके किसी काम नहीं आता। सम्मान गुणों से मिलता है, कुल से नहीं।
मिलकर करें मिलान
| फूल किसका प्रतीक | काँटा किसका प्रतीक |
|---|---|
| दया, परोपकार, प्रेम | स्वार्थ |
| अच्छाई, सुख, सुंदरता | बुराई, दुख |
| कोमलता, प्रसन्नता, आनंद | कठोरता, पीड़ा |
सोच-विचार के लिए
सबका जन्म एक ही जगह होता है। एक ही पौधा पालता है। सब पर एक-सी चाँदनी, एक-सी वर्षा और एक-सी हवा पड़ती है।
काँटा दूसरों को दुख देता है। फूल दूसरों को सुख, रस, सुगंध और आनंद देता है।
मनुष्य ऊँचे कुल में जन्म लेने से बड़ा नहीं बनता। वह अपने अच्छे स्वभाव और अच्छे कर्मों से बड़ा बनता है।
एक धनी परिवार का लड़का घमंडी है और सबसे बुरा व्यवहार करता है। लोग उसका आदर नहीं करते। दूसरी ओर एक गरीब परिवार का लड़का विनम्र और मददगार है। सब उसकी प्रशंसा करते हैं। अर्थात् कुल नहीं, गुण काम आते हैं।
लोग विनम्र, दयालु, सच्चे और मददगार व्यक्तियों की प्रशंसा करते हैं। घमंडी, झगड़ालू, स्वार्थी और दूसरों को दुख देने वाले लोगों से सब दूर रहना पसंद करते हैं।
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अनुमान और कल्पना से
बाकी पौधे सूखे और मुरझाए दिखेंगे। उन्हें पानी और हवा नहीं मिलेगी, इसलिए वे बढ़ नहीं पाएँगे और नष्ट हो जाएँगे।
दुनिया नीरस लगती। रंग, सुगंध, फल और आकार की विविधता न होती। प्रकृति की सुंदरता कम हो जाती।
चारों ओर सुंदरता होती। पर पौधों की रक्षा कम हो जाती। जानवर उन्हें आसानी से खा जाते या लोग फूल तोड़ लेते।
तितली — “काँटे भाई, क्या तुम मेरे मित्र बनोगे?”
काँटा — “मैं तो सबको चुभता हूँ। कोई मुझसे मित्रता नहीं करता।”
तितली — “तुम फूल की रक्षा करते हो। यह भी अच्छा काम है। बस किसी को बिना कारण दुख मत देना।”
काँटा — “ठीक है, आज से मैं केवल रक्षा करूँगा, किसी को सताऊँगा नहीं।”
मैं फूल के गुण अपनाना चाहूँगा। फूल सबको सुख और आनंद देता है। पर आवश्यकता पड़ने पर अपनी और दूसरों की रक्षा के लिए काँटे जैसी दृढ़ता भी रखूँगा।
शब्द से जुड़े शब्द
‘बड़प्पन’ से जुड़े शब्द :
बड़प्पन
| गोला बनाइए (बड़प्पन का भाव) | रेखा खींचिए (बड़प्पन का भाव नहीं) |
|---|---|
| सहनशीलता, दया, विश्वास, उदारता, विनम्रता, त्याग, संतोष, समर्पण, आदर, सम्मान, निष्ठा, परोपकार, सद्भावना | अहंकार, घमंड, ईर्ष्या, द्वेष, प्रतिशोध, क्रूरता, स्वार्थ, अपमान, अविश्वास, झूठ, अधीरता, लालच, झगड़ालूपन |
कविता की रचना
- हर दूसरी पंक्ति का अंतिम शब्द तुकांत है, जैसे — पालता/डालता, बही/नहीं।
- ‘और’ के स्थान पर ‘औ’ जैसे छोटे रूपों का प्रयोग।
- ‘प्यार-डूबी तितलियों’ जैसे सामासिक प्रयोग।
- फूल और काँटे को प्रतीक बनाकर मनुष्यों के स्वभाव की बात कही गई है।
- फूल-काँटे को मनुष्यों जैसे काम करते दिखाया गया है।
- मुहावरों का प्रयोग, जैसे — आँख में खटकना।
| कविता की विशेषता | कविता की पंक्ति (क्रमांक) |
|---|---|
| 1. एक ही वर्ण से शुरू होने वाले दो शब्द एक पंक्ति में | 1 (कुल की), 5 (कली का) |
| 2. मुहावरे का प्रयोग | 4 (आँख में खटकना) |
| 3. प्रश्न पूछा गया है | 1 |
| 4. प्राकृतिक वस्तुओं में मानवीय कार्य और भावनाएँ | 2, 3, 5, 6 |
| 5. विपरीत अर्थ वाले शब्दों का प्रयोग | 4 (खटकता — सोहता) |
कविता का सौंदर्य
- पहली पंक्ति में रात, रात्रि, रजनी, निशा — सभी जँचते हैं। चाँद, चंद्रमा, शशि, राकेश, इंदु — सभी जँचते हैं। लय की दृष्टि से रात और चाँद सबसे अच्छे हैं।
- दूसरी पंक्ति में मेह, बादल, मेघ, जलद — सभी जँचते हैं। लय में मेह सबसे अच्छा है।
- ‘हैं बही’ के साथ बहुवचन स्त्रीलिंग शब्द चाहिए। इसलिए हवायें और बयारें जँचते हैं। वायु, पवन, समीर, मारुत नहीं जँचते।
(ख) कौन-सा शब्द सबसे अधिक साथियों को जँच रहा है, इस पर समूह में चर्चा कीजिए।
विशेषण
| पंक्ति | विशेषण | विशेष्य |
|---|---|---|
| 1. भौंर का है बेध देता श्याम तन | श्याम | तन |
| 2. फाड़ देता है किसी का वर बसन | वर (श्रेष्ठ) | बसन |
| 3. भौंर को अपना अनूठा रस पिला | अनूठा | रस |
| 4. निज सुगंधों औ निराले ढंग से | निज, निराले | सुगंधों, ढंग |
| विशेष्य | विशेषण |
|---|---|
| फूल | सुंदर, सुगंधित |
| काँटा | नुकीला, तीखा |
| मेह | घना, झमाझम |
| चाँद | चमकीला, पूरा |
| रात | अँधेरी, ठंडी |
पाठ से आगे — आपकी बात
मैं फूल को चुनूँगा। फूल सबको सुख, सुगंध और प्रसन्नता देता है। सब उससे प्रेम करते हैं।
मैं घर के कामों में मदद करता हूँ। मित्रों की पढ़ाई में सहायता करता हूँ। सबसे मीठा बोलता हूँ और दुख में साथ देता हूँ।
दिन-रात, सुख-दुख, धूप-छाँव, खट्टा-मीठा, काला-सफेद, गर्मी-सर्दी, नमक-चीनी, शांत-क्रोधी स्वभाव।
हमारे मोहल्ले में जगह-जगह कचरा फेंका जाता है। इससे बदबू और बीमारियाँ फैलती हैं। समाधान — सब लोग कचरा कूड़ेदान में डालें। गीला और सूखा कचरा अलग रखें। मोहल्ले में स्वच्छता अभियान चलाया जाए।
सृजन
(क) इस कविता पर अपनी कल्पना से एक चित्र बनाइए।
फूल — “मैं दूसरों के जीवन में सुगंध और सुख फैलाने आया हूँ।”
काँटा — “और मैं संघर्ष की याद दिलाने और सुरक्षा देने के लिए हूँ।”
फूल — “पर तुम तितलियों और भौंरों को चोट क्यों पहुँचाते हो?”
काँटा — “मैं तो तुम्हें तोड़ने वालों से बचाता हूँ। हम दोनों मिलकर ही पौधे को पूरा बनाते हैं।”
फूल — “सच कहा भाई! तुम मेरी रक्षा करो, मैं सबको आनंद दूँगा।”
वाद-विवाद
‘जीवन में फूल और काँटे, दोनों की आवश्यकता होती है’ — इस विषय पर शिक्षक के मार्गदर्शन में समूहों में वाद-विवाद का आयोजन कीजिए।
आज की पहेली
- बबूल — पीले छोटे गुच्छेदार फूल, लंबे नुकीले काँटे।
- गुलाब — लाल, सफेद, गुलाबी फूल; तने पर छोटे तीखे काँटे।
- नागफनी — रंग-बिरंगे फूल; पूरी सतह पर काँटे; सूखे क्षेत्रों में मिलता है।
- बेर — छोटे हल्के पीले फूल; शाखाओं पर छोटे काँटे।
- करौंदा — छोटे सफेद सुगंधित फूल; फल से अचार और जैम बनते हैं।
- नीबू — छोटे सफेद सुगंधित फूल; खट्टे फल विटामिन सी से भरपूर।