3. संवादहीन
शेखर जोशी की कहानी — सार, बहुविकल्पी प्रश्न, प्रश्न-उत्तर, कहानी का सौंदर्य व अंत, मुहावरे, शब्द-युग्म, वाक्य भेद व शब्द-संपदा. NCERT हिंदी (गंगा).
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पाठ का परिचय : ‘संवादहीन’ शेखर जोशी की कहानी है। यह गाँव की एक वृद्ध स्त्री (ताई) के अकेलेपन की संवेदनशील कहानी है। तोता मिट्ठू ताई के लिए बात करने का माध्यम और ममता का केंद्र है। कहानी पलायन, अकेलेपन तथा आदर्श और यथार्थ के द्वंद्व को दिखाती है।
पाठ का सार
ताई के बड़े घर में कभी बहू-बेटे, नौकर-चाकर और गाय-ढोर सब थे। बेटे शहर चले गए और बेटियाँ ब्याहकर अपने घर चली गईं। खेती-बाड़ी पराए हाथों में चली गई। ताई सूने घर में अकेली रह गईं।
गनपत ताई के लिए एक पहाड़ी तोता ले आया। ताई की सारी ममता मिट्ठू पर बरस पड़ी। मिट्ठू ‘राम-राम’, ‘सीताराम’, ‘हर हर गंगे’ बोलता और ताई की बातों का उत्तर देता। घर में फिर से रौनक आ गई।
ताई कुंभ-स्नान के लिए प्रयागराज गईं और मिट्ठू को जगन मास्टर की पत्नी के पास छोड़ गईं। स्वतंत्र विचारों वाले जगन मास्टर को पिंजरे में बंद तोता देखकर दुख होता था। वे रोज उसे कमरे में थोड़ी देर बाहर निकालते। एक दिन मिट्ठू रोशनदान से उड़ गया।
गनपत वैसा ही दूसरा तोता ले आया। जगन मास्टर उसे बोलना सिखाते रहे, पर वह कुछ नहीं सीखा। लौटकर ताई ने उसे पुकारा, पर वह चुप रहा। ताई का साथी न जाने किन अमराइयों में घूम रहा होगा।
मेरे उत्तर मेरे तर्क
उत्तर : (ख) ममता और स्नेह
कारण : ताई मिट्ठू को बेटे की तरह पालती थीं और उसे ‘जीते रहो बेटा’ कहकर आशीष देती थीं।
उत्तर : (घ) करुणा और नैतिकता
कारण : पिंजरे में बंद मिट्ठू को देखकर उन्हें बेचैनी होती थी। वे उसे खुली हवा देकर अपने पाप का प्रायश्चित करना चाहते थे।
उत्तर : (ग) स्वतंत्रता की चाह
कारण : खुला रोशनदान देखते ही वह बाहर की दुनिया की ओर उड़ गया और फिर नहीं लौटा।
उत्तर : (ख) परिवार से दूरी और संवाद का अभाव
कारण : बहू-बेटे शहर चले गए थे। सूने घर में ताई से बात करने वाला कोई नहीं था।
उत्तर : (ग) अकेलापन
कारण : गाँवों से पलायन के कारण बुजुर्ग अकेले रह जाते हैं। ताई इसका उदाहरण हैं।
मेरी समझ मेरे विचार
ताई अपने जीवन रूपी नैया की बात कर रही हैं। बुढ़ापे में वे बिलकुल अकेली हैं। उनका कोई सहारा नहीं है। इसलिए उन्हें चिंता है कि बचा हुआ जीवन कैसे कटेगा।
बहू-बेटे शहर चले गए और बेटियाँ ससुराल चली गईं। कारोबार सँभालने वाला कोई नहीं रहा। इसलिए खेती-बाड़ी और कारोबार धीरे-धीरे दूसरों के हाथ में चला गया। नौकर-चाकर भी छूट गए।
ताई के बच्चे दूर चले गए थे। उनकी ममता को कोई पात्र नहीं मिल रहा था। सूना घर उन्हें काटने को दौड़ता था। मिट्ठू के आने से उन्हें बात करने वाला साथी मिल गया। इसलिए उनकी सारी ममता मिट्ठू पर उमड़ पड़ी।
- ताई जो पहले अपने लिए चूल्हा जलाने में आलस करती थीं, अब मिट्ठू के लिए नियम से खाना बनाने लगीं।
- उनका जीवन उदासी से निकलकर फिर सक्रिय हो गया।
- वे गाँव और आस-पास की बातों में रुचि लेने लगीं।
- उनके मन में फिर से किसी की देखभाल करने का उत्साह जाग गया।
- सिद्धांतवादी : उन्होंने अपने नियम-सिद्धांत बना रखे थे।
- संवेदनशील : पिंजरे में बंद मिट्ठू को देखकर उन्हें बेचैनी होती थी।
- स्वतंत्रता के समर्थक : वे दूसरों की स्वतंत्रता में बाधा नहीं डालना चाहते थे, इसलिए मिट्ठू को रोज बाहर निकालते थे।
- जिम्मेदार : मिट्ठू के उड़ जाने पर उन्होंने खाना-पीना छोड़कर नए तोते को घंटों बोलना सिखाया।
- धुन के पक्के : मिट्ठू बाहर नहीं आया, तो दाना बिखेरकर उसे बाहर बुलाया।
यह शीर्षक सबसे अधिक ताई के लिए सार्थक है। परिवार के जाने के बाद ताई के जीवन में संवाद ही खत्म हो गया था। मिट्ठू ही उनकी बातचीत का एकमात्र साथी था। उसके उड़ जाने और नए तोते के चुप रहने से ताई फिर से संवादहीन हो गईं।
कभी वह घर लोगों से भरा रहता था। अब वहाँ ताई अकेली रह गई थीं। न बच्चे थे, न नौकर-चाकर, न कोई रौनक। घर की देखभाल भी नहीं होती थी। इसलिए वह बड़ा घर सूने खंडहर जैसा हो गया था।
मेरे प्रश्न — उपयुक्त प्रश्न पहचानिए
| उत्तर | उपयुक्त प्रश्न |
|---|---|
| 1. ताई के अकेलेपन को मिट्ठू ने सहारा दिया। | प्रश्न क : ताई के सूनेपन को किसने सहारा दिया था? |
| 2. ताई के लौटने से पहले मिट्ठू उड़ गया था। | प्रश्न ख : ताई के प्रयागराज से लौटने से पहले क्या अनहोनी हुई? |
| 3. गाँववालों को डर था कि ताई को सच्चाई जानकर सदमा लगेगा। | प्रश्न क : गाँववाले ताई की वापसी से क्यों चिंतित थे? |
| 4. कहानी का शीर्षक ‘संवादहीन’ जीवन के मौन का प्रतीक है। | प्रश्न ख : शीर्षक ‘संवादहीन’ का क्या भावार्थ है? |
मेरे अनुभव मेरे विचार
जब मैं विद्यालय की यात्रा पर बाहर जाता हूँ, तो मुझे अपनी बीमार दादी की चिंता रहती है। मैं बार-बार फोन करके उनका हाल पूछता हूँ। मन घर की ओर ही लगा रहता है और घूमने में भी पूरा आनंद नहीं आता।
हाँ, पशु-पक्षियों में भी संवेदनाएँ होती हैं। हमारे घर का कुत्ता मोती मेरे विद्यालय से लौटते ही खुशी से पूँछ हिलाने लगता है। एक बार मैं बीमार था, तो वह दिन-भर मेरे बिस्तर के पास बैठा रहा। वह मेरा दुख समझता था।
मेरे विचार से यह उचित नहीं था। ताई अपने मिट्ठू को अच्छी तरह पहचानती थीं। झूठ अधिक दिन नहीं छिपता। सच पता चलने पर उन्हें दोहरा दुख हुआ। अच्छा होता कि उन्हें प्यार से सच बताया जाता और सब मिलकर उन्हें सहारा देते।
नमूना उत्तर : मैंने सोचा था कि जन्मदिन पर मेरे मित्र मुझे शुभकामना देने घर आएँगे। पर शाम तक कोई नहीं आया। मैं उदास हो गया। तभी दरवाजे की घंटी बजी और सारे मित्र केक लेकर आ गए। उन्होंने मुझे चौंकाने के लिए यह योजना बनाई थी।
हाँ, लंबे समय तक बंद रहने पर प्राणी पिंजरे के आदी हो जाते हैं। उन्हें बिना मेहनत के दाना-पानी मिलने की आदत पड़ जाती है। चिड़ियाघर के कई पशु खुला दरवाजा देखकर भी बाहर नहीं निकलते। फिर भी अवसर मिलते ही उनकी स्वतंत्रता की चाह जाग जाती है, जैसे मिट्ठू की जागी।
कहानी का सौंदर्य
| विशेष बिंदु | कहानी से नया उदाहरण |
|---|---|
| चित्रात्मकता (दृश्य बिंब) | ढीली धोती को दोनों हाथों से सँभालते हुए वह बाग में एक पेड़ से दूसरे पेड़ के पास, ‘मिट्ठू आ! मिट्ठू आ!!’ पुकारते हुए पसीना-पसीना होते रहे। |
| संवादात्मकता | “मेरी जान खाने को आ गया है, मर जा!” और मिट्ठू — “मर जा! मर जा! मर जा!” |
| पुनरुक्ति | खुश रहो! खुश रहो!! |
| अतिशयोक्ति | ताई तो कुंभ-स्नान के लिए चल दीं, लेकिन जगन मास्टर के घर में महाकुंभ हो गया। |
| लोकधर्मी भाषा | अपनी अकेली जान के लिए ताई दो जून का एक जून चूल्हा फूँक लेतीं। |
| प्रश्नोत्तर शैली | किसके भरोसे कारबार सँभलता? |
कहानी का अंत
इस कहानी का अंत दुखांत और यथार्थवादी है। ताई का एकमात्र साथी मिट्ठू उड़ जाता है और वे फिर अकेली रह जाती हैं। यह जीवन की सच्चाई जैसा लगता है। अंत कुछ मुक्त भी है, क्योंकि पाठक सोचता रह जाता है कि ताई का आगे क्या हुआ होगा।
नया अंत : ताई की आँखों में आँसू देखकर जगन मास्टर ने सच-सच बता दिया। ताई पहले बहुत दुखी हुईं। फिर बोलीं, “अच्छा किया मास्टर, बेचारा आजाद तो हुआ।” उन्होंने नए तोते को भी पिंजरे से उड़ा दिया। अब गाँव के बच्चे रोज ताई के पास कहानियाँ सुनने आते हैं। ताई का घर फिर से संवादों से भर गया।
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पाठ से आगे
पहले गाँवों में स्त्रियों को प्रायः उनके पति के नाम या पद से पुकारा जाता था, जैसे — मास्टराइन, जगन मास्टर की घरवाली। लेखक ने यही ग्रामीण यथार्थ दिखाया है। साथ ही, कहानी में उनकी भूमिका छोटी है, इसलिए उनका नाम आवश्यक नहीं समझा गया।
- क्यों : मान्यता है कि ग्रहों की विशेष स्थिति में पवित्र नदियों में स्नान करने से पुण्य मिलता है। कुंभ हर बारह वर्ष में प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में बारी-बारी से होता है।
- पिछला आयोजन : महाकुंभ 13 जनवरी से 26 फरवरी 2025 तक प्रयागराज में (गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम पर) हुआ।
- अगला आयोजन : सिंहस्थ कुंभ मेला नासिक-त्र्यंबकेश्वर (गोदावरी तट) पर 31 अक्तूबर 2026 से आरंभ होकर 2027 तक चलेगा।
ताई गाँव के दस-बारह लोगों के साथ बस से नजदीकी स्टेशन पहुँचीं। वहाँ से प्रयागराज की रेलगाड़ी का टिकट लिया। साथ में पोटली में पूड़ियाँ, अचार और गुड़ बाँधकर ले गईं। रास्ते-भर सब भजन गाते रहे। प्रयागराज में वे एक धर्मशाला में ठहरीं। भोर में संगम पर स्नान किया, दान दिया और मेले में घूमीं। पर हर पल उनका मन मिट्ठू में ही लगा रहा।
गणेशोत्सव का मेला — देखना : रंग-बिरंगे पंडाल, रोशनी की झालरें और गणपति की सुंदर मूर्तियाँ। सुनना : ढोल-ताशों की गूँज और ‘गणपति बाप्पा मोरया’ के जयकारे। सूँघना : धूप-अगरबत्ती और फूलों की सुगंध। छूना : भीड़ में एक-दूसरे के कंधों की धक्का-मुक्की और प्रसाद की गुनगुनी गरमी। स्वाद : मोदक और गरम जलेबी का मीठा स्वाद। चारों ओर श्रद्धा और आनंद का वातावरण था।
कल्पना और लेखन
उन्होंने अच्छी नौकरी, बच्चों की अच्छी पढ़ाई और शहर की सुविधाओं के लिए गाँव छोड़ा होगा। गाँव छोड़ते समय उन्हें माँ, घर और खेतों की याद आई होगी। मन दुखी भी हुआ होगा। फिर उन्होंने सोचा होगा कि शहर में बसकर माँ को भी बुला लेंगे। इसी आशा से उन्होंने अपने मन को तैयार किया होगा।
एक दिन आकाश में वही हरे पंख चमके। मिट्ठू ताई के आँगन के अमरूद के पेड़ पर आ बैठा और जोर से बोला, “राम राम! सीताराम!” ताई दौड़ती हुई बाहर आईं। पिंजरे में बैठे नए तोते को देखकर मिट्ठू बोला, “मर जा! मर जा!” फिर हँसता-सा बोला, “खुश रहो! खुश रहो!!”
ताई ने उसे दाना दिया, पर पिंजरे में बंद नहीं किया। अब मिट्ठू रोज सुबह आता, ताई से बातें करता और शाम को पेड़ों पर लौट जाता। ताई ने नए तोते को भी आजाद कर दिया। अब दोनों तोते आँगन में आकर ताई का मन बहलाते हैं।
प्रश्न 3 : अपने दादा-दादी या किसी बुजुर्ग से उनके बचपन के खेल, काम और बातों के बारे में पूछकर अपनी पुस्तिका में लिखें।
तलाश है — इनाम पाइए
हमारा प्यारा पहाड़ी तोता ‘मिट्ठू’ 10 तारीख को घर के रोशनदान से उड़ गया है। रंग हरा, चोंच लाल, गले पर काली-गुलाबी धारी। वह ‘राम राम’, ‘सीताराम’ और ‘हर हर गंगे’ बोलता है।
जिस किसी को भी दिखे, कृपया नीचे दिए पते पर सूचना दें। सूचना देने वाले को उचित इनाम दिया जाएगा।
संपर्क : जगन मास्टर, प्राथमिक पाठशाला के पास, गाँव ......
व्याकरण की बात
| मुहावरा | अर्थ |
|---|---|
| हाथों के तोते उड़ जाना | घबरा जाना, होश उड़ जाना |
| अपने मुँह मियाँ मिट्ठू बनना | अपनी प्रशंसा आप करना |
| भैंस के आगे बीन बजाना | मूर्ख को उपदेश देना व्यर्थ होना |
| आस्तीन का साँप | विश्वासघाती मित्र |
| गिरगिट की तरह रंग बदलना | बार-बार अपनी बात बदलना |
| मगरमच्छ के आँसू बहाना | झूठा दुख दिखाना |
| ऊँट के मुँह में जीरा | आवश्यकता से बहुत कम |
| घोड़े बेचकर सोना | निश्चिंत होकर गहरी नींद सोना |
- खटखट : दरवाजे पर खटखट की आवाज हुई।
- टपटप : छत से पानी टपटप टपक रहा था।
- सरसर : हवा से पत्ते सरसर करने लगे।
- गड़गड़ : आकाश में बादल गड़गड़ा रहे थे।
- भिनभिन : मिठाई पर मक्खियाँ भिनभिना रही थीं।
- चहचहाना : सुबह पेड़ों पर चिड़ियाँ चहचहाने लगीं।
| शब्द-युग्म | अर्थ | वाक्य |
|---|---|---|
| वक्त-बेवक्त | समय-असमय, कभी भी | छोटा भाई वक्त-बेवक्त खाने की माँग करता है। |
| नियम-सिद्धांत | बने हुए नियम और विचार | दादाजी अपने नियम-सिद्धांतों के पक्के हैं। |
| शादी-ब्याह | विवाह आदि शुभ कार्य | शादी-ब्याह में घर मेहमानों से भर जाता है। |
| तीज-त्योहार | पर्व और उत्सव | तीज-त्योहार पर पूरा परिवार इकट्ठा होता है। |
- ‘तंग’ का विपरीतार्थक शब्द — ढीली
- मुहावरा — पसीना-पसीना होना (पंख तौलना)
- क्रिया — सँभालते, पुकारते, होते रहे
- संज्ञा — धोती, बाग, पेड़, डाल, पंख, मिट्ठू
- सर्वनाम — वह, अपने
- विशेषण — ढीली, दोनों, एक, दूसरे
- कारक चिह्न — को, से, में, के, पर
- कर्ता — वह (जगन मास्टर), मिट्ठू
| वाक्य का भेद | उदाहरण |
|---|---|
| विधानवाचक | ताई कुंभ-स्नान के लिए चल दीं। |
| निषेधवाचक | पेट की समस्या उनके लिए कभी समस्या नहीं रही। |
| प्रश्नवाचक | भगवान! कैसे नैया पार लगेगी? |
| विस्मयादिबोधक | देखते ही देखते क्या से क्या हो गया! |
| आज्ञावाचक | ताई, मिट्ठू को भी साथ ले चलो। |
| इच्छावाचक | खुश रहो! |
| संदेहवाचक | शायद वह उनकी बेवकूफी पर हँसता रहता हो। |
| संकेतवाचक | अगर मिट्ठू न उड़ता, तो ताई को दुख न होता। |
समूह गतिविधियाँ
1. दुख, स्नेह और आजादी — इन भावों का समूह में मूक अभिनय करें। 2. ‘अगर मिट्ठू की तरह उड़ने का मौका मिले तो कहाँ जाएँगे?’ — इस पर समूह में चर्चा करें। 3. घर की महिलाओं से उनकी पसंद का भोजन पूछें और जानें कि वह कितनी बार बनता है।
- हरा रंग और लाल है चोंच, राम-राम रटता बिन सोच। — तोता
- लोहे की तीलियों का घर, पंछी रहे जिसमें डर-डर। — पिंजरा
- हिमालय से निकले, सागर में जाए, जिसके तट पर कुंभ लग जाए। — गंगा
भाषा संगम : ‘तोता’ को मराठी में ‘पोपट’, संस्कृत में ‘शुकः’ और तमिल में ‘किळि’ कहते हैं। दिए गए वाक्य को अपनी मातृभाषा में लिखें।
शब्द-संपदा
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| ढोर | पालतू चौपाया पशु |
| तकाजा | बार-बार माँगना, अनुरोध |
| कुशाग्र | तेज, तीक्ष्ण (बुद्धि) |
| पौ फटना | सुबह का उजाला होना |
| अचकचाना | चौंक उठना |
| निहाल | बहुत प्रसन्न, तृप्त |
| अतल | अथाह, बहुत गहरा |
| रोबीला | प्रभावशाली |
| तुनकमिजाज | छोटी बात पर नाराज होने वाला |
| वियोग | बिछुड़ना, विरह |
| साँकल | दरवाजे की कुंडी, जंजीर |
| टोह | खोज, देखभाल |
| देहरी | दरवाजे की चौखट का निचला भाग |
| प्रायश्चित | पाप दूर करने के लिए किया गया कर्म |
| कौतूहलवश | उत्सुकता के कारण |
| मशगूल | किसी काम में लगा हुआ |
| अर्जन | कमाना, संग्रह करना |
| एवजी | बदले में आया हुआ |
| आग्नेय | अग्नि जैसा |
| जून | समय, बेला |