कक्षा १० हिंदी · दूसरी इकाई

८. अपनी गंध नहीं बेचूँगा

कवि — बालकवि बैरागी | संपूर्ण स्वाध्याय, भावार्थ, पद्य विश्लेषण और उपयोजित लेखन — महाराष्ट्र राज्य पाठ्यपुस्तक मंडळ (लोकभारती)।

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कवि परिचय : बालकवि बैरागी जी द्वारा रचित प्रस्तुत गीत में गीतकार ने फूल के स्वभाव की विशेषता बताते हुए यह संदेश दिया है कि किसी भी परिस्थिति में फूल अपनी गंध (स्वाभिमान) नहीं बेचता। फूल के इस स्वाभिमान को मनुष्य को भी अपने जीवन में अपनाना चाहिए।

स्वाध्याय (प्रश्न-उत्तर)

१कृति पूर्ण कीजिए : फूल बेचना नहीं चाहता —
अपनी गंध (सुगंध) अपनी सौगंध (संस्कार) स्वयं से किया हुआ अनुबंध (समझौता) तन पर लगाया गया प्रतिबंध
२लिखिए :

१. फूल को बिक जाने से भी बेहतर लगता है —
अपनी माटी में झर जाना (मर जाना)।

२. फूल के अनुसार उसे तोड़ने का पहला अधिकार इन्हें है —
जिस डाली ने गोद खिलाया, जिस कोंपल ने अरुणाई (लालिमा) दी और जिन काँटों ने लक्ष्मण जैसी चौकी देकर जान बचाई।

३कृति पूर्ण कीजिए : अंत पता होने पर भी फूल की अभिलाषा —
  • मरने से पहले पवन परी के संग एक-एक के घर जाना।
  • अपनी गंध के द्वारा सबकी भूल-चूक की माफी लेना।
  • इस मंडी को खुद्दारी (स्वाभिमान) का पाठ पढ़ाना।
  • बिकने के बजाय अपनी माटी में हँसते-हँसते झर जाना।
४सूची बनाइए : इनका फूल से संबंध है —
डाली कोंपल काँटे मालिन पंखुरियाँ भँवर पवन परी

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५कारण लिखिए :

१. फूल अपनी सौगंध नहीं बेचेगा —
कारण : क्योंकि वह सौगंध फूल का अपना संस्कार बन गई है और वह अपने स्वाभिमान से कभी समझौता नहीं करेगा।

२. फूल को मौसम से कुछ लेना नहीं है —
कारण : क्योंकि मौसम तो अपनी गति से आते-जाते रहेंगे; फूल को अपने अस्तित्व और अपनी खुद्दारी से मतलब है, मौसम के बदलने से उसकी निष्ठा नहीं बदलती।

६'दाता होगा तो दे देगा, खाता होगा तो खाएगा' इस पंक्ति से स्पष्ट होने वाला अर्थ लिखिए ।

अर्थ : इस पंक्ति के माध्यम से कवि कहना चाहते हैं कि फूल को प्रकृति या भाग्य पर पूरा भरोसा है। जीवन में जो भी दाता (देने वाला) ईश्वर या मौसम उसे देगा, वह उसे स्वीकार करेगा और जो उसका भाग्य (खाता) होगा, वह उसे प्राप्त करेगा। उसे बाहरी दुनिया की लालसा या मोल-भाव से कोई सरोकार नहीं है।

७निम्नलिखित मुद्दों के आधार पर पद्य विश्लेषण कीजिए :
१. रचनाकार का नामबालकवि बैरागी
२. रचना का प्रकारगीत
३. पसंदीदा पंक्ति"बिकने से बेहतर मर जाऊँ अपनी माटी में झर जाऊँ,
मन ने तन पर लगा दिया जो वो प्रतिबंध नहीं बेचूँगा।"
४. पसंदीदा होने का कारणउपयुक्त पंक्तियों में फूल अपने आत्म-सम्मान और स्वाभिमान की रक्षा के लिए धन-दौलत के आगे झुकने के बजाय अपने ही वजूद में मिट जाना बेहतर समझता है। यह जीवन मूल्य हमें सिखाता है कि स्वाभिमान से बढ़कर दुनिया में कुछ भी अनमोल नहीं है।
५. रचना से प्राप्त संदेश/प्रेरणाइस कविता से हमें यह महान संदेश मिलता है कि मनुष्य को कितनी भी बड़ी मुसीबत या प्रलोभन क्यों न मिले, उसे कभी भी अपने स्वाभिमान, चरित्र और संस्कारों का सौदा नहीं करना चाहिए।