१४. मैं सड़क हूँ
सड़क की आत्मकथा — संपूर्ण स्वाध्याय, अंत्याक्षरी और सड़क को साफ-सुथरी रखने के उपाय। महाराष्ट्र राज्य पाठ्यपुस्तक मंडळ (सुलभभारती)।
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पाठ का परिचय : यह एक आत्मकथात्मक पाठ है। इसमें सड़क स्वयं अपनी कहानी बता रही है। सड़क लोगों को उनकी मंजिल तक पहुँचाती है, पर उसे दुख होता है जब लोग उसे गंदा करते हैं या बिना कारण गड्ढे खोद देते हैं। सड़क हमें स्वच्छता और मेल-जोल का संदेश देती है।
स्वाध्याय
सड़क → किनारे → रास्ता → तकनीक → काम → मकान → निकिता → ताँगा → गाजर → रश्मि ।
उत्तर (आगे के शब्द) :
जानकारी : अंत्याक्षरी में दिए गए शब्द के अंतिम अक्षर से नया शब्द बनाना होता है। आप अपनी पसंद के अन्य शब्द भी बना सकते हैं।
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सड़क को साफ-सुथरी रखने के लिए हम निम्नलिखित उपाय कर सकते हैं:
- कचरा न फेंकें : चलते हुए या गाड़ी से सफर करते समय सड़क पर खाली बोतलें, रैपर या छिलके न फेंकें। हमेशा कूड़ेदान (Dustbin) का ही उपयोग करें।
- थूकने पर रोक : पान, गुटखा या तंबाकू खाकर सड़क पर या दीवारों के कोनों पर न थूकें।
- गड्ढे न बनाएँ : सड़क को बेवजह न खोदें। यदि पानी की पाइपलाइन या किसी अन्य काम के लिए खुदाई करनी पड़े, तो काम पूरा होते ही उसे ठीक से भर दें।
- जानवरों को न बाँधें : सड़क के किनारे जानवरों (गाय, भैंस) को न बाँधें, जिससे गोबर और गंदगी से सड़क खराब न हो।
- पेड़ लगाएँ : सड़क के दोनों ओर पेड़-पौधे लगाने चाहिए। इससे सड़क सुंदर दिखती है और पर्यावरण भी स्वच्छ रहता है।
अतिरिक्त उपक्रम (Extra Activity)
'मैं नदी हूँ' (आत्मकथा का एक नमूना) :
"मैं नदी हूँ। मेरा जन्म पहाड़ों की ऊँचाइयों पर हुआ था। वहाँ से कल-कल करती हुई मैं मैदानों की ओर बहती हूँ। मेरा जीवन दूसरों की प्यास बुझाने और खेतों को हरा-भरा करने के लिए ही है। मेरे किनारे गाँव और शहर बसे हैं। लोग मेरे पानी से नहाते हैं, कपड़े धोते हैं और कारखानों में मेरा उपयोग करते हैं।
मुझे यह देखकर बहुत खुशी होती है कि मैं सबके काम आती हूँ। लेकिन जब लोग मुझमें कारखानों का गंदा पानी, प्लास्टिक और शहर का कचरा डालते हैं, तो मुझे बहुत दुख होता है। गंदगी के कारण मेरा दम घुटने लगता है। मैं चाहती हूँ कि लोग मुझे स्वच्छ रखें, ताकि मैं हमेशा उन्हें मीठा पानी देती रहूँ।"