११. वीरों को प्रणाम
रमेश दीक्षित — कविता का भावार्थ, पंक्तियों का क्रम, स्वतंत्रता सेनानियों के नाम और संपूर्ण स्वाध्याय। महाराष्ट्र राज्य पाठ्यपुस्तक मंडळ (सुलभभारती)।
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कविता का परिचय : 'वीरों को प्रणाम' कविता रमेश दीक्षित जी द्वारा रचित है । इस कविता में भारत माता के उन वीर सपूतों को श्रद्धांजलि दी गई है, जिन्होंने देश की आज़ादी और रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए।
जिन्हें प्राण से प्यारा ।
प्रणाम ऐसे वीरों को,
सौ-सौ बार हमारा ।।
कविता का भावार्थ (सारांश)
कवि रमेश दीक्षित जी कहते हैं कि हमें यह आज़ादी किसी से भीख या दया के रूप में नहीं मिली है। हमारे स्वतंत्रता सेनानियों और वीरों ने अपने प्राणों का बलिदान (प्राणार्पण) देकर इसे प्राप्त किया है ।
देश के वीर जवानों को अपने देश की मिट्टी का एक-एक कण अपने प्राणों से भी अधिक प्यारा होता है। ऐसे महान वीरों को हमारा सौ-सौ बार प्रणाम है ।
भारत वह पवित्र धरती है जहाँ गंगा और यमुना जैसी महान नदियाँ बहती हैं। यहाँ के लोगों के मन में अपने देश की रक्षा के लिए मर मिटने की धुन (जुनून) हमेशा सवार रहती है ।
इन्हीं वीरों के निस्वार्थ बलिदान के कारण हमारे भारत देश (हिंद वतन) का तारा पूरी दुनिया में चमक रहा है। हम देश के ऐसे वीरों को सौ-सौ बार नमस्कार करते हैं ।
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स्वाध्याय : प्रश्न-उत्तर
१. प्राणार्पण की सीख में ।।
२. जिन्हें प्राण से प्यारा ।
३. सीखा हम लोगों ने कुछ तो,
४. देश की मिट्टी का कण-कण है,
कविता के अनुसार पंक्तियों का सही क्रम :
अतिरिक्त अभ्यास (Extra Practice)
शिक्षक निर्देश : पाठ्यपुस्तक में दी गई सूचना के अनुसार विद्यार्थियों को स्वतंत्रता सेनानियों के नाम बताने के लिए प्रेरित करें ।
- (१) हमें आज़ादी किस रूप में नहीं मिली है?
हमें आज़ादी किसी से भीख के रूप में नहीं मिली है । - (२) वीरों को अपने प्राणों से भी प्यारा क्या है?
वीरों को देश की मिट्टी का कण-कण अपने प्राणों से भी प्यारा है । - (३) भारत की धरती पर कौन-सी नदियाँ बहती हैं?
भारत की धरती पर गंगा और जमना (यमुना) नदियाँ बहती हैं । - (४) हिंद वतन का तारा किससे चमक रहा है?
वीरों के बलिदान से हिंद वतन का तारा चमक रहा है ।