कक्षा ५ हिंदी · पहली इकाई

३. योग्य चुनाव

लेखिका सुधा शर्मा द्वारा रचित कहानी 'योग्य चुनाव' की सीख, सारांश और अतिरिक्त प्रश्न-उत्तर। महाराष्ट्र राज्य पाठ्यपुस्तक मंडळ (सुलभभारती)।

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पाठ का परिचय : ‘योग्य चुनाव’ सुधा शर्मा जी द्वारा रचित एक प्रेरक कहानी है। इस कहानी में बताया गया है कि एक सच्चे और योग्य मंत्री में परोपकार, सेवाभाव और ईमानदारी के गुण होने चाहिए। कर्मवीर नामक एक निर्धन नवयुवक अपनी निस्वार्थ सेवा से यह सिद्ध करता है कि वही राज्य के ऊँचे पद का सच्चा अधिकारी है।

अभ्यास (स्वाध्याय)

१इस कहानी से क्या सीख मिलती है, बताओ।

इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि इंसान को हमेशा परोपकारी, सेवाभावी और ईमानदार होना चाहिए। हमें दूसरों के दुख-दर्द को समझना चाहिए और बिना किसी स्वार्थ या इनाम की लालसा के उनकी सहायता करनी चाहिए।

जो व्यक्ति सामान्य आदमी की पीड़ा से दुखी होता है और उसे दूर करने का प्रयास करता है, वही जीवन में सफलता और ऊँचे पद का सच्चा अधिकारी बनता है। बाहरी दिखावे से अधिक व्यक्ति के आंतरिक गुण और कर्म महत्त्व रखते हैं।

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पाठ्यांश पर आधारित अतिरिक्त प्रश्न-उत्तर

२राजा मंगलसेन के मंत्री का नाम क्या था और उन्होंने राजा से क्या विनती की?

राजा मंगलसेन के मंत्री का नाम जगतराम था। बूढ़े हो जाने के कारण उन्होंने राजा से स्वयं को सेवामुक्त करने की विनती की थी।

३राजा ने नए मंत्री के चुनाव के लिए क्या शर्त रखी?

राजा मंगलसेन ने शर्त रखी कि जगतराम पहले अपने जैसे ही सेवाभावी, परोपकारी और ईमानदार मंत्री का चुनाव कर लें, तभी उन्हें सेवामुक्त किया जा सकता है।

४बैलगाड़ी वाले वृद्ध की सहायता किसने और कैसे की?

बैलगाड़ी वाले वृद्ध की सहायता कर्मवीर नामक एक निर्धन और प्रतिभाशाली नवयुवक ने की। उसने राजदरबार पहुँचने की चिंता न करते हुए सीधे कीचड़ में उतरकर ज़ोर लगाया और बैलगाड़ी का फँसा हुआ पहिया कीचड़ से बाहर निकाला।

५बैलगाड़ी वाला वृद्ध वास्तव में कौन था?

वह बैलगाड़ी वाला वृद्ध कोई और नहीं, बल्कि स्वयं मंत्री जगतराम थे, जो मार्ग में बैठकर उम्मीदवारों की परीक्षा ले रहे थे।

कक्षा में करने योग्य कृति