२. तूफानों से क्या डरना
शिखा शर्मा — कविता का भावार्थ, सार, हाव-भाव कृति, विरुद्धार्थी शब्द, पंचमाक्षर की जोड़ियाँ तथा सभी कृतियों के उत्तर. महाराष्ट्र राज्य पाठ्यपुस्तक मंडळ (सुलभभारती).
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कविता के बारे में
‘तूफानों से क्या डरना’ कविता की कवयित्री शिखा शर्मा हैं। इस कविता में मनुष्य की जुझारू वृत्ति दिखाई गई है। जीवन में संकट रूपी तूफान आते रहते हैं। उनसे डरना नहीं चाहिए। सूचना है — ‘सुनो, समझो और गाओ’।
मुख्य बिंदु
- किसी से नफरत न करो, सबसे प्रेम करो।
- हिम्मत करनेवाले को सबकी मदद मिलती है।
- जीवन हार-जीत का खेल है। इसे हँसकर जीना चाहिए।
- समय एक-सा नहीं रहता। रात के बाद सवेरा अवश्य होता है।
- व्याकरण : विरुद्धार्थी शब्द और पंचमाक्षर।
शब्दार्थ
- सत्कर्म – अच्छा कार्य
- तूलिका – ब्रश
- धीरज – धैर्य
- अभिमान – घमंड
- आत्मज्ञान – स्वयं का ज्ञान
ध्यान दें : कविता की मूल पंक्तियाँ यहाँ नहीं दी गई हैं — वे प्रकाशित पाठ्यपुस्तक से ही पढ़ें। यहाँ कविता का भावार्थ अपने शब्दों में तथा सभी कृतियों के उत्तर दिए गए हैं।
कविता का भावार्थ
कवयित्री कहती हैं कि किसी से नफरत नहीं करनी चाहिए। सबसे प्रेम करना चाहिए। जीवन में संकट रूपी तूफान आते ही रहते हैं। उनसे डरना नहीं चाहिए। जो हिम्मत करता है, उसे सबकी मदद मिल जाती है। हमें अच्छे कामों की तूलिका से जीवन में रंग भरने चाहिए।
विशेष : ‘सत्कर्मों की तूलिका’ एक सुंदर रूपक है। चित्रकार ब्रश से चित्र में रंग भरता है। वैसे ही मनुष्य अच्छे कामों से जीवन सुंदर बनाता है।
जीवन हार-जीत का खेल है। इसे खेल समझकर ही खेलना चाहिए। जो कुछ मिले, उसे खुशी से स्वीकार करना चाहिए। जब तक जियो, हँसते हुए जियो।
विशेष : यहाँ खेल भावना का संदेश है। हार पर निराश न हो और जीत पर घमंड न करो।
धूप और छाँव जीवन का हिस्सा हैं। कभी उजाला होता है, तो कभी अँधेरा। रात कितनी भी लंबी हो, उसके बाद सवेरा होता है। समय कभी एक-सा नहीं रहता। इसलिए धीरज रखना चाहिए।
विशेष : दुख के बाद सुख अवश्य आता है। यही आशावाद है।
शरीर के अभिमान के कारण समाज में बुराइयाँ महामारी की तरह फैल गई हैं। सबको सच्चा रास्ता दिखाना हमारी जिम्मेदारी है। आत्मज्ञान का दीपक जलाकर अज्ञान का अँधेरा दूर करना चाहिए।
इस कविता का सार
‘तूफानों से क्या डरना’ कविता में कवयित्री शिखा शर्मा ने मनुष्य की जुझारू वृत्ति को उभारा है। जीवन में संकट आते-जाते रहते हैं। उनसे डरकर रुकना नहीं चाहिए। सबसे प्रेम करना चाहिए। हिम्मत करनेवाले को सबका सहयोग मिलता है।
जीवन हार-जीत का खेल है। जो मिले, उसे खुशी से स्वीकार करो और हँसकर जियो। रात कितनी भी लंबी हो, सवेरा अवश्य होता है। इसलिए धीरज रखना चाहिए।
शरीर का अभिमान छोड़कर सबको सच्ची राह दिखानी चाहिए। आत्मज्ञान का दीप जलाकर अज्ञान दूर करना चाहिए। यह कविता हिम्मत, धैर्य और सत्कर्म का पाठ पढ़ाती है।
टीप : सार लिखते समय कविता की पंक्तियाँ ज्यों-की-त्यों न लिखो। मुख्य भाव अपने शब्दों में लिखो।
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स्वयं अध्ययन — चित्र देखकर हाव-भाव की नकल करो
पाठ्यपुस्तक में सात चेहरों के चित्र दिए गए हैं। हर चेहरा एक भाव दिखाता है —
- खिलखिलाकर हँसती स्त्री — आनंद
- लाल आँखें, भींचे हुए दाँत — क्रोध
- चढ़ी भौंहें, बंद मुँह — चिढ़ / रूठना
- सपाट चेहरा, एक ओर देखता हुआ — सोच-विचार
- आँखों से बहते आँसू — दुख
- मुँह खोलकर हँसता लड़का — उल्लास
- शांत मुसकान वाली लड़की — संतोष
कैसे करें : यह अभिनय की कृति है। दर्पण के सामने खड़े होकर हर भाव का अभ्यास करो। भाव आँखों, भौंहों और हाथों से भी प्रकट होते हैं। कक्षा में एक विद्यार्थी भाव दिखाए और बाकी उसे पहचानें।
शब्द वाटिका — नए शब्द
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| सत्कर्म | अच्छा कार्य |
| अभिमान | घमंड |
| महामारी | संक्रामक भीषण रोग |
| तूलिका | ब्रश |
| धीरज | धैर्य |
| आत्मज्ञान | स्वयं का ज्ञान |
| देह | शरीर |
| तूफाँ | तूफान, आँधी (यहाँ — संकट) |
| जुझारू वृत्ति | संघर्ष करते रहने का स्वभाव |
भाषा की ओर
अन्य उत्तर भी मान्य : लंबी × छोटी, अंत × आरंभ, सत्कर्म × दुष्कर्म, सच्ची × झूठी।
समझो हमें — पंचमाक्षर के अनुसार जोड़ियाँ मिलाओ
हर वर्ग का अंतिम वर्ण उस वर्ग का पंचमाक्षर कहलाता है — ङ, ञ, ण, न, म। अनुस्वार के बाद जिस वर्ग का वर्ण आता है, वहाँ उसी वर्ग के पंचमाक्षर की ध्वनि होती है।
| पतंग (वर्ग) | पंचमाक्षर | शब्द |
|---|---|---|
| क ख ग घ ङ | ङ | कंगना, संघमित्रा, पंख, कंकाल |
| च छ ज झ ञ | ञ | चंचल, जंजाल, पंछी, झंझा |
| ट ठ ड ढ ण | ण | कंठ, डंडा, पंढरी, घंटा |
| त थ द ध न | न | गंधर्व, अंदर, अंतिम, मंथन |
| प फ ब भ म | म | चंबल, इंफाल, अचंभा, चंपारन |
नियम याद रखो : पंख (क वर्ग → ङ), पंछी (च वर्ग → ञ), कंठ (ट वर्ग → ण), अंदर (त वर्ग → न), चंबल (प वर्ग → म)।
खोजबीन — देश-विदेश के समय की तालिका
भारतीय मानक समय ग्रीनविच के समय से ५ घंटे ३० मिनट आगे है। भारत में दोपहर के १२:०० बजे हों, तब कुछ देशों का समय इस प्रकार होगा —
| देश | ग्रीनविच से अंतर | भारत में दोपहर १२:०० होने पर वहाँ |
|---|---|---|
| भारत | + ५:३० | दोपहर १२:०० |
| नेपाल | + ५:४५ | दोपहर १२:१५ |
| श्रीलंका | + ५:३० | दोपहर १२:०० |
| पाकिस्तान | + ५:०० | सुबह ११:३० |
| बांग्लादेश | + ६:०० | दोपहर १२:३० |
| संयुक्त अरब अमीरात | + ४:०० | सुबह १०:३० |
| चीन / सिंगापुर | + ८:०० | दोपहर २:३० |
| जापान | + ९:०० | दोपहर ३:३० |
| ऑस्ट्रेलिया (सिडनी) | + १०:०० | शाम ४:३० |
| इंग्लैंड (लंदन) | ० (ग्रीनविच) | सुबह ६:३० |
| अमेरिका (न्यूयॉर्क) | − ५:०० | रात १:३० |
ध्यान दो : कुछ देशों में गर्मी के महीनों में घड़ी एक घंटा आगे की जाती है। उन महीनों में अंतर एक घंटा बदल जाता है। भारत में यह पद्धति नहीं है।
अन्य कृतियाँ
यदि समय का चक्र रुक जाए, तो सूरज आकाश में वहीं ठहर जाएगा। न सुबह होगी, न शाम। घड़ी की सुइयाँ रुक जाएँगी।
पेड़ों पर न नई कोंपलें आएँगी, न फल पकेंगे। बीज से अंकुर नहीं फूटेगा। बच्चे सदा बच्चे ही रहेंगे।
तब न कोई नया दिन होगा, न नई आशा। इसलिए समय का चलते रहना ही सबसे बड़ा वरदान है।
टीप : यह कल्पनात्मक प्रश्न है। अपनी कल्पना से अलग उत्तर भी दिया जा सकता है।
साक्षरता अर्थात पढ़ना-लिखना आना। निरक्षर लोगों को पढ़ना-लिखना सिखाने का कार्यक्रम साक्षरता अभियान कहलाता है।
- इसमें बड़ी आयु के लोगों को अक्षर, अंक और हस्ताक्षर करना सिखाया जाता है।
- ये वर्ग गाँव के विद्यालय या ग्रामपंचायत में चलाए जाते हैं।
- ८ सितंबर को अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाया जाता है।
- साक्षर व्यक्ति फॉर्म भर सकता है और सूचनाएँ पढ़ सकता है। उसे कोई धोखा नहीं दे सकता।
- हम भी किसी निरक्षर व्यक्ति को अक्षर सिखा सकते हैं।
ग्रंथालय से किसी समाजसेवी महिला की जीवनी पढ़ो। उसका प्रेरणादायी अंश कक्षा में सुनाओ। कुछ नाम —
कैसे प्रस्तुत करो : पहले उनका छोटा परिचय दो। फिर सबसे प्रेरणादायी प्रसंग सुनाओ। अंत में बताओ कि तुमने उससे क्या सीखा।
सुनो तो जरा : रेडियो पर एकाग्रता से भजन सुनो और उसे दोहराओ। उसकी लय, शब्द और भाव पर ध्यान दो।
वाचन जगत से : मीरा का कोई पद पढ़ो और उसका सरल अर्थ बताओ। मीराबाई श्रीकृष्ण की परम भक्त थीं।
मेरी कलम से : महीने में एक बार कविता का श्रुतलेखन करो। श्रुतलेखन अर्थात सुनकर लिखना। कोई कविता बोले और तुम उसे शुद्ध वर्तनी में लिखो। बाद में मूल कविता से मिलाकर जाँच लो।
विचार मंथन व सदैव ध्यान में रखो
यह पंक्ति कवि वृंद के दोहे की है। इसका अर्थ है — लगातार अभ्यास करने से मंद बुद्धि वाला भी बुद्धिमान बन जाता है। रस्सी के बार-बार रगड़ने से पत्थर पर भी निशान पड़ जाता है। वैसे ही अभ्यास से कठिन विषय भी सरल हो जाता है।
दूसरा संदेश है सकारात्मक सोच। ऐसा व्यक्ति कठिनाई में भी रास्ता खोज लेता है।
मैंने समझा
इस कविता से मैंने समझा कि जीवन में कठिनाइयाँ आती ही हैं। उनसे डरकर भागना नहीं चाहिए। हिम्मत से उनका सामना करना चाहिए।
समय कभी एक-सा नहीं रहता। रात के बाद सवेरा आता है। वैसे ही दुख के बाद सुख आता है। इसलिए मैं कठिन समय में धीरज रखूँगा और अच्छे काम करूँगा।
टीप : ‘मैंने समझा’ में विद्यार्थी को स्वयं के शब्दों में लिखना अपेक्षित है। ऊपर दिया गया उत्तर केवल नमूना है।