कक्षा ६ हिंदी · पहली इकाई

३. उपहार

कहानी का सारांश, चित्र पहचानकर नाम, संज्ञा के भेद, शब्द वाटिका, मुहावरे, समानार्थी शब्द तथा सभी कृतियों के उत्तर. महाराष्ट्र राज्य पाठ्यपुस्तक मंडळ (सुलभभारती).

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पाठ के बारे में

‘उपहार’ एक कहानी है। इसमें ऋत्विक नाम के गरीब लड़के की ईमानदारी की कहानी है। रास्ते में मिली पोटली उसने उसके मालिक को लौटा दी। इस ईमानदारी का उसे सुंदर उपहार मिला।

मुख्य बिंदु

  • लक्ष्य पाने के लिए रुचि और लगन आवश्यक है।
  • ईमानदार व्यक्ति के जीवन में किसी वस्तु की कमी नहीं होती।
  • दूसरे की वस्तु पर हमारा अधिकार नहीं होता।
  • ऋत्विक ने गाँव के बच्चों के लिए पुस्तकालय खोला और ‘पुस्तक मित्र’ कहलाया।
  • व्याकरण : संज्ञा और उसके पाँच भेद।

शब्दार्थ

  • राहगीर – पथिक
  • ध्येय – लक्ष्य
  • उत्तीर्ण – पास होना
  • हैरान – चकित
  • पोटली – छोटी थैली

कहानी का सारांश

एक गाँव में ऋत्विक नाम का गरीब लड़का रहता था। गाँव के पास ‘पुस्तक मेला’ लगा था। ऋत्विक ने माँ से मेला देखने की इच्छा बताई। साथ जाने के लिए घर में कोई बड़ा नहीं था। इसलिए माँ ने मना कर दिया। ऋत्विक उदास होकर एक पेड़ के नीचे बैठ गया।

तभी उसे सुनहरे पंखोंवाली एक परी दिखाई दी। ऋत्विक ने रोते हुए अपनी इच्छा बताई। परी ने कहा कि वह उसकी परीक्षा लेगी। परीक्षा में उत्तीर्ण होने पर ही वह उसकी सहायता करेगी। परीक्षा कौन-सी है, यह परी ने नहीं बताया।

लौटते समय ऋत्विक को रास्ते में लाल मखमली पोटली मिली। उसने पोटली नहीं खोली। उसने सोचा — जो वस्तु मेरी नहीं है, उसे खोलने का मुझे अधिकार नहीं। तभी एक राहगीर अपनी पोटली ढूँढ़ता हुआ आया। उसने पोटली की सही पहचान बताई। ऋत्विक ने पोटली उसे लौटा दी।

अगली सुबह परी फिर मिली। उसने ऋत्विक की आँखें बंद करवाईं और उसके हाथों में वही पोटली रख दी। परी ने बताया कि राहगीर के रूप में वह स्वयं आई थी। वह ऋत्विक की ईमानदारी की परीक्षा ले रही थी।

ऋत्विक ने पोटली माँ को दी। खोलते ही पोटली कई गुना बड़ी हो गई। उसमें से ढेर सारी सुंदर पुस्तकें निकलीं। ऋत्विक ने बहन कृतिका की सहायता से पुस्तकालय खोला। पूरा गाँव उसे ‘पुस्तक मित्र’ कहने लगा।

एक दिन पढ़ते-पढ़ते उसकी आँख लग गई। सपने में पुस्तकों ने पूछा — बड़े होकर क्या तुम हमें भूल जाओगे? ऋत्विक ने कहा — नहीं, अब तो तुम ही मेरी साथी हो, मित्र हो। जागने के बाद वह देर तक सोचता रहा कि आगे चलकर वह एक बड़ा पुस्तक भंडार खोलेगा।

चित्र पहचानकर उनके नाम लिखो — ‘नाम हमारे’

  1. घर (लाल छतवाला मकान) — जातिवाचक संज्ञा
  2. नदी — जातिवाचक संज्ञा
  3. अमरूद — जातिवाचक संज्ञा
  4. हिमालय / पर्वत — व्यक्तिवाचक / जातिवाचक संज्ञा
  5. अनाज (गेहूँ) — द्रव्यवाचक संज्ञा
  6. गुच्छा (चाबियों का) — समूहवाचक संज्ञा
  7. भीड़ — समूहवाचक संज्ञा
  8. दूध — द्रव्यवाचक संज्ञा
  9. बुढ़ापा (छड़ी के सहारे खड़ा वृद्ध) — भाववाचक संज्ञा
  10. ढेर (आमों का) — समूहवाचक संज्ञा

टीप : यह चित्र-आधारित कृति है। इसलिए एक से अधिक उत्तर हो सकते हैं। जैसे — चित्र ४ के लिए पर्वत या हिमालय, चित्र ५ के लिए गेहूँ या अनाज। यह कृति संज्ञा के भेद समझाने के लिए दी गई है।

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आओ, संज्ञा समझें

किसी व्यक्ति, वस्तु, स्थान, प्राणी या भाव के नाम को संज्ञा कहते हैं। कहानी में आए संज्ञा शब्द हैं — परी, ऋत्विक, ढेर, ईमानदारी, दूध। संज्ञा के पाँच भेद हैं —

  • व्यक्तिवाचक संज्ञा — किसी विशेष व्यक्ति, स्थान या वस्तु का नाम। जैसे — ऋत्विक, कृतिका।
  • जातिवाचक संज्ञा — पूरी जाति का बोध करानेवाला नाम। जैसे — परी, राहगीर, पुस्तक, पेड़।
  • भाववाचक संज्ञा — गुण, भाव या दशा का नाम। जैसे — ईमानदारी, खुशी, दुख।
  • समूहवाचक संज्ञा — समूह का बोध करानेवाला नाम। जैसे — ढेर, गुच्छा, भीड़।
  • द्रव्यवाचक संज्ञा — नापी-तौली जानेवाली वस्तु का नाम। जैसे — दूध, अनाज, सोना।

शब्द वाटिका

१नए शब्द
शब्दअर्थ
तेजप्रखर
पोटलीछोटी थैली
हैरानचकित
राहगीरपथिक
ध्येयलक्ष्य, उद्देश्य
उत्तीर्णपास होना
मखमलीमखमल का बना, मुलायम
२मुहावरे — अर्थ सहित वाक्य में प्रयोग
  • आँखें भर आना — दुखी होना।
    वाक्य : पुराना विद्यालय छोड़ते समय राधा की आँखें भर आईं।
  • तय करना — निश्चय करना।
    वाक्य : मैंने प्रतिदिन एक घंटा पढ़ना तय किया है।
  • चकित होना — आश्चर्य करना।
    वाक्य : छोटे बच्चे का सुंदर चित्र देखकर सब चकित हो गए।
  • आँख लगना — नींद आ जाना।
    वाक्य : थकान के कारण यात्रा में मेरी आँख लग गई।

भाषा की ओर

१निम्नलिखित शब्दों के समानार्थी शब्द इस कहानी से ढूँढ़कर बताओ।
सखा — मित्र, साथी वृक्ष — पेड़ जननी — माँ नयन — आँखें भगिनी — बहन

किसने किससे कहा है, बताओ

१. ‘‘तुम यहाँ उदास क्यों बैठे हो?’’ — यह वाक्य परी ने ऋत्विक से कहा।
२. ‘‘मेरी पोटली गिर गई है रास्ते में।’’ — यह वाक्य राहगीर के रूप में आई परी ने ऋत्विक से कहा।
३. ‘‘और कोई पहचान बताओ।’’ — यह वाक्य ऋत्विक ने राहगीर से कहा।
४. ‘‘नहीं-नहीं, अब तो तुम ही मेरी साथी हो, मित्र हो।’’ — यह वाक्य ऋत्विक ने सपने में पुस्तक से कहा।

खोजबीन

१गृह उद्योगों की जानकारी प्राप्त करो और इसपर चर्चा करो।

गृह उद्योग घर में चलाया जानेवाला छोटा उद्योग है। इसमें कम पूँजी लगती है। प्रायः परिवार के सदस्य ही इसमें काम करते हैं।

पापड़-मसाले बनाना अचार-मुरब्बा अगरबत्ती व मोमबत्ती सिलाई-कढ़ाई मिट्टी के बर्तन बाँस व बेंत की टोकरियाँ कागज की थैलियाँ साबुन व फिनाइल बकरी-मुर्गी पालन मधुमक्खी पालन

लाभ :

  • गाँव में ही रोजगार मिलता है।
  • महिलाओं को घर बैठे आमदनी होती है।
  • कम पूँजी में उद्योग शुरू किया जा सकता है।
  • आस-पास मिलनेवाले कच्चे माल का उपयोग होता है।

अन्य कृतियाँ

१सुनो तो जरा — कार्टून कथा सुनकर उसे हाव-भाव सहित सुनाओ।
२बताओ तो सही — बड़े होकर क्या बनना चाहते हो?

बड़ा होकर मैं शिक्षक बनना चाहता हूँ। मुझे पढ़ना और दूसरों को समझाना अच्छा लगता है। जब मित्र मुझसे कोई कठिन प्रश्न समझ लेते हैं, तो मुझे बड़ी खुशी होती है।

ऋत्विक की तरह मैं भी गाँव में एक छोटा पुस्तकालय शुरू करूँगा। इससे गरीब बच्चे भी खूब पढ़ सकेंगे।

टीप : यह उत्तर केवल नमूना है। अपनी रुचि के अनुसार अपने शब्दों में उत्तर बताओ।

३वाचन जगत से — महादेवी वर्मा का कोई रेखाचित्र पढ़कर उसके पात्रों के नाम लिखो।

यह वाचन-कृति है, इसे स्वयं करो। महादेवी वर्मा हिंदी की प्रसिद्ध कवयित्री और रेखाचित्रकार थीं। उनके रेखाचित्रों में मनुष्य और पशु-पक्षी दोनों पात्र हैं। जैसे —

  • स्मृति की रेखाएँ — भक्तिन, चीनी फेरीवाला, ठकुरी बाबा
  • अतीत के चलचित्र — रामा, घीसा, बिंदा
  • मेरा परिवार — गिल्लू (गिलहरी), सोना (हिरनी), गौरा (गाय), नीलकंठ (मोर)

ध्यान दो : तुमने जो रेखाचित्र पढ़ा हो, उसी के पात्रों के नाम लिखो। ऊपर दी गई सूची केवल मार्गदर्शन के लिए है।

४मेरी कलम से — इस कहानी के किसी एक अनुच्छेद का अनुलेखन करो।
५जरा सोचो .......... बताओ — यदि तुम्हें परी मिल जाए तो .....

यदि मुझे परी मिल जाए, तो मैं उससे कहूँगा कि गाँव के हर बच्चे तक पुस्तकें पहुँचा दो। जिन घरों में बीमारी और दुख है, वहाँ मुस्कान लौटा दो।

मैं अपने लिए खिलौने या धन नहीं माँगूँगा। मैं कहूँगा कि मुझे परिश्रमी बना दो। अपनी मेहनत से मिली चीज का आनंद ही अलग होता है।

टीप : यह कल्पनात्मक प्रश्न है। अपनी कल्पना से अलग उत्तर भी दिया जा सकता है।

६अध्ययन कौशल — किसी परिचित अन्य कहानी लेखन के लिए मुद्दे तैयार करो।

कहानी लिखने से पहले मुद्दे तैयार करो। इससे लेखन सरल और क्रमबद्ध होता है। मुद्दे इस क्रम में बनाओ —

  1. शीर्षक — कहानी का उचित और आकर्षक नाम।
  2. स्थान और समय — घटना कहाँ और कब घटी।
  3. पात्र — कहानी में कौन-कौन हैं और उनका स्वभाव कैसा है।
  4. आरंभ — कहानी किस घटना से शुरू होती है।
  5. समस्या — मुख्य पात्र के सामने कौन-सी कठिनाई आती है।
  6. घटनाक्रम — आगे क्या-क्या हुआ, क्रम से।
  7. अंत — समस्या कैसे सुलझी।
  8. सीख — कहानी से क्या शिक्षा मिलती है।
७स्वयं अध्ययन — दिए गए चित्रों के आधार पर उचित और आकर्षक विज्ञापन तैयार करो।

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विज्ञापन बनाते समय ध्यान रखो : आकर्षक नाम, चौकट, घोषवाक्य, वस्तुओं की सूची, छूट, पता और समय — ये सब होने चाहिए। भाषा कम शब्दों में और प्रभावी होनी चाहिए।

विचार मंथन व सदैव ध्यान में रखो

।। ईमानदारी चरित्र निर्माण की नींव है ।। सच्चाई में ही सफलता निहित है ।

मजबूत नींव पर ही इमारत टिकती है। उसी तरह ईमानदारी से ही अच्छा चरित्र बनता है। ऋत्विक ने पोटली नहीं खोली। उसने पोटली उसके मालिक को लौटा दी। उसकी सच्चाई ही उसकी सफलता का कारण बनी।

मैंने समझा

इस कहानी से मैंने समझा कि ईमानदारी सबसे बड़ा गुण है। ऋत्विक चाहता तो पोटली अपने पास रख सकता था। पर उसने ऐसा नहीं किया। इसी सच्चाई का उसे बड़ा उपहार मिला।

जिस काम में सच्ची रुचि और लगन हो, वह जीवन का ध्येय बन जाता है। ऋत्विक ने पुस्तकें अपने तक नहीं रखीं। उसने गाँव के बच्चों के लिए पुस्तकालय खोला। बाँटने से आनंद बढ़ता है।

टीप : ‘मैंने समझा’ में विद्यार्थी को स्वयं के शब्दों में लिखना अपेक्षित है। ऊपर दिया गया उत्तर केवल नमूना है।