कक्षा ६ हिंदी · पहली इकाई

४. जोकर

मुहावरे और कहावतें — अर्थ, वाक्य में प्रयोग, सांकेतिक चित्र, ‘हाथ’ के मुहावरे तथा बारहखड़ी शब्द कृति के संपूर्ण उत्तर. महाराष्ट्र राज्य पाठ्यपुस्तक मंडळ (सुलभभारती).

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पाठ के बारे में

‘जोकर’ पाठ में जोकर के आठ चित्र दिए गए हैं। हर चित्र के नीचे एक वाक्य है। इन वाक्यों से छह मुहावरे और दो कहावतें सिखाई गई हैं। मुहावरों और कहावतों से थोड़े शब्दों में बड़ी बात कही जाती है। सूचना है — ‘पढ़ो, समझो और लिखो’।

मुख्य बिंदु

  • मुहावरा वाक्य का एक अंश होता है। उसका अर्थ शब्दों के सामान्य अर्थ से अलग होता है।
  • कहावत अपने आप में पूरा वाक्य होती है। वह अनुभव से निकली सीख देती है।
  • मुहावरों और कहावतों से भाषा प्रभावी और रोचक बनती है।
  • बारहखड़ी के क्रम से नए शब्द बनाना सीखते हैं।
  • जोकर की तरह हमें सदा प्रसन्न रहना चाहिए।

शब्दार्थ

  • जान पर खेलना – प्राणों की परवाह न करना
  • फूला न समाना – अत्यधिक खुश होना
  • दंग रहना – आश्चर्यचकित होना
  • आँखें दिखाना – गुस्सा होना

पाठ में आए वाक्य और मुहावरे

  1. जोकर अपनी जान पर खेलकर कलाबाजियाँ दिखाता है। — जान पर खेलना
  2. जोकर झूठ-मूठ का ठहाका लगाकर लोगों को हँसाता है। — ठहाका लगाना
  3. उचित प्रतिसाद न मिलने पर जोकर मन मसोसकर रह गया। — मन मसोसकर रह जाना
  4. खेल समाप्त होने पर कुछ बच्चों ने जोकर को धन्यवाद कहा। वह फूला नहीं समाया। — फूला न समाना
  5. एक बच्चे को अपनी नकल करते देखकर जोकर दंग रह गया। — दंग रहना
  6. जोकर शोर मचाने वाले बच्चों को आँखें दिखा रहा था। — आँखें दिखाना
  7. मौका मिलने पर जोकर कलाकारों के करतबों का श्रेय लेता है। — गंगा गए गंगादास, जमना गए जमनादास कहावत
  8. गाना तो आता नहीं और जोकर कहता है गला खराब है। — नाच न जाने, आँगन टेढ़ा कहावत

शब्द वाटिका

१मुहावरे
  • जान पर खेलना – प्राणों की परवाह न करना
  • ठहाका लगाना – जोर से हँसना
  • मन मसोसकर रह जाना – कुछ न कर पाना
  • फूला न समाना – अत्यधिक खुश होना
  • दंग रहना – आश्चर्यचकित होना
  • आँखें दिखाना – गुस्सा होना
२कहावतें
  • गंगा गए गंगादास, जमना गए जमनादास – अवसरवादी होना
  • नाच न जाने, आँगन टेढ़ा – अपना दोष छिपाने के लिए दूसरों में कमी बताना

अंतर समझो : मुहावरा वाक्य का एक अंश होता है। वह अकेले पूरा अर्थ नहीं देता (जैसे — ‘आँखें दिखाना’)। कहावत अपने आप में पूरा वाक्य होती है (जैसे — ‘नाच न जाने, आँगन टेढ़ा’)।

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मुहावरों एवं कहावतों का वाक्य में प्रयोग

जान पर खेलना — बाढ़ में फँसे बच्चों को बचाने के लिए जवान अपनी जान पर खेल गए।
ठहाका लगाना — दादाजी का चुटकुला सुनकर सभी ने ठहाका लगाया।
मन मसोसकर रह जाना — टिकट समाप्त हो जाने के कारण मुझे मन मसोसकर रह जाना पड़ा।
फूला न समाना — प्रथम क्रमांक आने की बात सुनकर सीमा फूली नहीं समाई।
दंग रहना — नन्हे बच्चे की चित्रकारी देखकर सब दंग रह गए।
आँखें दिखाना — कक्षा में शोर होते ही शिक्षक ने विद्यार्थियों को आँखें दिखाईं।
गंगा गए गंगादास, जमना गए जमनादास — रमेश हर किसी की हाँ में हाँ मिलाता है। उसका तो यही हाल है — गंगा गए गंगादास, जमना गए जमनादास।
नाच न जाने, आँगन टेढ़ा — राहुल ने पढ़ाई नहीं की और कहने लगा कि प्रश्नपत्र ही कठिन था। इसे कहते हैं — नाच न जाने, आँगन टेढ़ा।

अध्ययन कौशल

१किन्हीं पाँच मुहावरों / कहावतों के सांकेतिक चित्र बनाओ।

पाठ्यपुस्तक में दो नमूने दिए गए हैं — घर + मुर्गी + दाल = घर की मुर्गी दाल बराबर तथा ९ + २ = ११ = नौ दो ग्यारह होना। इसी प्रकार नीचे दिए संकेतों से चित्र बनाओ —

  1. अक्ल का दुश्मन (मूर्ख होना) — सिर के पास प्रश्नचिह्न बनाओ। उस पर काट का निशान लगाओ।
  2. आँखों का तारा (बहुत प्रिय होना) — आँख के भीतर चमकता हुआ तारा बनाओ।
  3. नाक में दम करना (बहुत परेशान करना) — नाक और उसके पास भिनभिनाती मक्खी बनाओ।
  4. अंधों में काना राजा (अज्ञानियों में थोड़ा जाननेवाला भी बड़ा माना जाता है) — आँखें बंद किए कई लोग बनाओ। बीच में मुकुट पहने एक आँखवाला व्यक्ति बनाओ।
  5. दाल में काला होना (कुछ गड़बड़ होना) — दाल की कटोरी में एक बड़ा काला धब्बा बनाओ।

टीप : यह चित्रकला की कृति है। तुम अपनी पसंद के दूसरे मुहावरे भी चुन सकते हो। जैसे — ‘ऊँट के मुँह में जीरा’, ‘अंगूठा दिखाना’।

खोजबीन

१‘हाथ’ शब्द को लेकर चार मुहावरे लिखो।
  1. हाथ बँटाना — सहायता करना।
    वाक्य : मैं घर के कामों में माँ का हाथ बँटाता हूँ।
  2. हाथ मलना — पछताना।
    वाक्य : समय पर न पढ़ने के कारण वह परीक्षा के बाद हाथ मलता रह गया।
  3. हाथ-पाँव फूलना — घबरा जाना।
    वाक्य : अचानक प्रश्न पूछने पर उसके हाथ-पाँव फूल गए।
  4. हाथ धो बैठना — खो देना।
    वाक्य : लापरवाही के कारण वह अपनी नई घड़ी से हाथ धो बैठा।

अन्य उत्तर भी मान्य : हाथ लगना (प्राप्त होना), हाथ खींच लेना (साथ छोड़ देना), हाथ पर हाथ धरे बैठना (कुछ न करना)।

स्वयं अध्ययन

१‘अब पछताए होत क्या, जब चिड़िया चुग गई खेत’ पर आधारित कोई कहानी सुनाओ।

अर्थ : समय निकल जाने के बाद पछताने से कोई लाभ नहीं होता।

चींटी और टिड्डा

गर्मी के दिन थे। एक चींटी दिन भर अनाज के दाने ढोकर अपने बिल में जमा कर रही थी। पास ही एक टिड्डा पेड़ की छाया में गाना गा रहा था। उसने चींटी से कहा, ‘‘इतनी धूप में क्यों मेहनत करती हो? आओ, मेरे साथ गाओ।’’ चींटी बोली, ‘‘वर्षा में बाहर निकलना कठिन होता है। इसलिए मैं अभी से अनाज जमा कर रही हूँ। तुम भी कुछ जमा कर लो।’’ टिड्डे ने उसकी बात हँसकर टाल दी।

कुछ दिनों बाद वर्षा शुरू हुई। सारा खेत पानी में डूब गया। टिड्डे को कहीं दाना नहीं मिला। भूख से व्याकुल होकर वह चींटी के पास गया। चींटी ने उसे कुछ दाने दिए। फिर कहा, ‘‘जब समय था, तब तुमने काम नहीं किया। अब पछताने से क्या लाभ?’’

टिड्डा सिर झुकाए बैठा रहा। उसे समझ में आ गया — अब पछताए होत क्या, जब चिड़िया चुग गई खेत।

टीप : यह कहानी केवल नमूना है। इसी अर्थ की कोई अन्य कहानी भी सुनाई जा सकती है।

जरा सोचो .......... बताओ

?यदि साइकिल तुमसे बोलने लगी तो ......

यदि मेरी साइकिल बोलने लगे, तो पहले वह शिकायत करेगी — ‘‘मित्र, तुम मुझे धूप में खड़ा छोड़ देते हो। मेरी जंजीर में तेल नहीं डालते। हवा कम होने पर भी मुझे दौड़ाते रहते हो।’’ यह सुनकर मुझे शरम आएगी।

फिर वह गर्व से कहेगी, ‘‘मैं तुम्हें बिना पेट्रोल के विद्यालय पहुँचाती हूँ। मुझसे न धुआँ निकलता है, न शोर होता है। मुझे चलाने से तुम्हारा शरीर भी स्वस्थ रहता है।’’

मैं उससे वादा करूँगा कि हर रविवार उसे साफ करूँगा। समय पर हवा भरवाऊँगा। छोटी दूरी के लिए हमेशा उसी को चुनूँगा।

टीप : यह कल्पनात्मक प्रश्न है। अपनी कल्पना से अलग उत्तर भी लिखा जा सकता है।

समझो हमें — बारहखड़ी के शब्द

पहले चित्र के नाम का पहला अक्षर लो। उसमें बीच का वर्ण जोड़ो। फिर दूसरे चित्र के नाम का अंतिम अक्षर जोड़ो। इस तरह ‘क’ की बारहखड़ी के क्रम से ये शब्द बनते हैं —

  1. कलम (क + ल + म)
  2. काला (का + ला)
  3. किसान (कि + सा + न)
  4. कीमत (की + म + त)
  5. कुटीर (कु + टी + र)
  6. कूकना (कू + क + ना)
  7. कृपा (कृ + पा)
  8. केकड़ा (के + क + ड़ा)
  9. कैलास (कै + ला + स)
  10. कोयल (को + य + ल)
  11. कौशिक (कौ + शि + क)
  12. कंगन (कं + ग + न)

टीप : शब्द क, का, कि, की, कु, कू, कृ, के, कै, को, कौ, कं — इसी बारहखड़ी क्रम में बनते हैं। इसी आधार पर उत्तर की जाँच करो।

विचार मंथन व सदैव ध्यान में रखो

।। गागर में सागर भरना ।। हमें सदैव प्रसन्न रहना चाहिए ।

गागर में सागर भरना अर्थात थोड़े शब्दों में बड़ी बात कहना। मुहावरे और कहावतें यही काम करते हैं। ‘नाच न जाने, आँगन टेढ़ा’ — इन थोड़े शब्दों में पूरी बात आ जाती है। इसलिए इनसे भाषा प्रभावी और रोचक बनती है।

पाठ का दूसरा संदेश है — सदा प्रसन्न रहना। जोकर स्वयं दुखी होने पर भी दूसरों को हँसाता है। हँसने से मन हल्का होता है। शरीर भी स्वस्थ रहता है।

मैंने समझा

इस पाठ से मैंने समझा कि मुहावरे और कहावतें भाषा के गहने हैं। इनसे कम शब्दों में बात प्रभावी ढंग से कही जाती है। अब मैं बोलते और लिखते समय इनका प्रयोग करूँगा।

जोकर से मैंने सीखा कि दूसरों को हँसाना बहुत बड़ा काम है। अपने दुख भूलकर जो दूसरों को प्रसन्न रखता है, वही सच्चा कलाकार है।

टीप : ‘मैंने समझा’ में विद्यार्थी को स्वयं के शब्दों में लिखना अपेक्षित है। ऊपर दिया गया उत्तर केवल नमूना है।