८. जन्मदिन
प्रेमस्वरूप श्रीवास्तव — कहानी का सारांश, वाक्यों के प्रकार, नए विरामचिह्न, शब्दयुग्म, प्रश्नोत्तर तथा पानी-बिजली बचत के उपाय. महाराष्ट्र राज्य पाठ्यपुस्तक मंडळ (सुलभभारती).
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पाठ के बारे में
‘जन्मदिन’ कहानी के लेखक प्रेमस्वरूप श्रीवास्तव हैं। बबलू पानी और बिजली बहुत बरबाद करता था। जन्मदिन की पार्टी में प्यास का अनुभव करके उसे पानी का महत्त्व समझ आया। यह कहानी पानी और बिजली बचाने की सीख देती है।
मुख्य बिंदु
- पानी और बिजली अनमोल हैं। इनका भंडार सीमित है।
- माँ और शीला मौसी ने बबलू को सबक सिखाने के लिए एक नाटक रचा।
- स्वयं अनुभव से मिली सीख सबसे अच्छी होती है।
- व्याकरण : सूचना, निर्देश, आदेश, अनुरोध और विनती वाले वाक्य।
- नए विरामचिह्न : योजक चिह्न, निर्देशक चिह्न और अवतरण चिह्न।
शब्दार्थ
- सन्नाटा – गहन शांति
- कटौती – कमी करना
- कामयाब – सफल
- छटपटाना – बेचैन होना
- कौर – ग्रास, निवाला
ध्यान दें : कहानी का मूल गद्यांश यहाँ नहीं दिया गया है — वह प्रकाशित पाठ्यपुस्तक से ही पढ़ें। यहाँ कहानी का सारांश अपने शब्दों में तथा पाठ्यपुस्तक की सभी कृतियों के उत्तर दिए गए हैं।
लेखक परिचय
प्रेमस्वरूप श्रीवास्तव — जन्म : ११ मार्च १९२९, खरौना, जौनपुर (उ.प्र.)।
प्रमुख रचनाएँ : विविध बालकहानियाँ, बालनाटक, लेख, रूपक आदि।
परिचय : आप पिछले छह दशकों से साहित्य सृजन से संलग्न हैं।
कहानी का सारांश
गरमी के दिन थे। सूरज आग बरसा रहा था। बबलू आधा घंटा शावर के नीचे धमा-चौकड़ी मचाता रहता। कभी-कभी नल की टोंटी भी खोल देता। माँ टोकतीं, तो कहता कि गरमी में उसका घंटों नहाने का मन करता है।
माता-पिता उसकी इस आदत से परेशान थे। वह मंजन करते समय भी पानी बहाता रहता। विद्यालय में भी नल खुला छोड़ देता। इसलिए उसे डाँट खानी पड़ती। बिजली का भी यही हाल था। कमरे में न होने पर भी पंखा चलता रहता। पढ़ते-पढ़ते सो जाने पर बल्ब जलता रहता।
उन्हीं दिनों शीला मौसी की बेटी पूजा का जन्मदिन आया। सब शाम को उनके घर पहुँचे। वहाँ का सन्नाटा देखकर बबलू को आश्चर्य हुआ। गुब्बारे और झालर सजे थे, पर बिजली नहीं थी। कूलर और पंखे बंद थे। केवल दो-एक मोमबत्तियाँ जल रही थीं। मौसी ने बताया कि गरमी में बिजली का भार बढ़ गया है। इसलिए कंपनी ने कटौती शुरू की है। आज उनके ब्लॉक की बारी है।
फिर भी जन्मदिन मनाया गया। आरती हुई, मिठाइयाँ बँटीं और बच्चों ने गुब्बारे फोड़े। खाते समय बबलू को जोर की प्यास लगी। सबके गिलास आधे ही भरे थे। बबलू एक घूँट में पूरा पानी पी गया, पर प्यास नहीं बुझी। जग खाली था। मौसी ने बताया कि पानी की टंकी की सफाई हो रही है।
बबलू का गला सूखने लगा। खाने का कौर गले से नीचे नहीं उतर रहा था। वह प्यास से छटपटाने लगा। तभी अचानक बिजली आ गई। कूलर-पंखे चलने लगे। अंकल को याद आया कि बड़े कूलर में पानी भरा है। फिर सबने ठंडे पानी के साथ भोजन का आनंद लिया। चलते समय मौसी और माँ एक-दूसरे को देखकर मुसकुराईं। बबलू इस मुसकुराहट का रहस्य नहीं समझ पाया।
घर लौटकर बबलू सोच में डूब गया। उसे प्यासी गौरैया, हाँफता टॉमी और अपना सूखता गला याद आ रहा था। उसने माँ से कहा कि वह आँगन में किसी बरतन में पानी भरकर रखेगा। अब वह पानी की एक बूँद भी बरबाद नहीं करेगा।
बबलू यह कभी नहीं जान पाया कि पार्टी में जो कुछ हुआ, वह एक नाटक था। माँ ने पहले ही मौसी को फोन पर उसकी आदत बता दी थी। मौसी ने उसे सबक सिखाने के लिए यह नाटक रचा। नाटक पूरी तरह कामयाब रहा। अब बबलू स्वयं दोस्तों को पानी और बिजली बचाने के लिए कहता है।
मैं कौन हूँ? — वाक्यों के प्रकार पहचानो
- बगीचे के फल-फूल तोड़ना मना है । — सूचना
- जैसे − फल, सब्जी लेकर घर आओ । — निर्देश
- ‘चंदामामा’ बालपत्रिका पढ़ो । — आदेश
- अपनी कृपा दृष्टि बनाए रखें । — अनुरोध
- बच्चों ने कहा, ‘‘कृपया हमें अंतरिक्ष के बारे में बताएँ ।’’ — विनती
अंतर समझो : सूचना केवल जानकारी देती है। निर्देश काम करने का तरीका बताता है। आदेश में अधिकार का भाव होता है। अनुरोध में नम्रता होती है। विनती में नम्रता के साथ प्रार्थना का भाव होता है। इसमें प्रायः ‘कृपया’ शब्द आता है।
नए विरामचिह्न
- ( - ) योजक चिह्न — दो शब्दों को जोड़ता है। जैसे — धमा-चौकड़ी, फल-फूल, अड़ोस-पड़ोस।
- ( — ) निर्देशक चिह्न — उदाहरण या स्पष्टीकरण देने के लिए लगाया जाता है।
- ( ‘ ’ ) इकहरा अवतरण चिह्न — किसी नाम या शीर्षक के लिए। जैसे — ‘चंदामामा’ बालपत्रिका।
- ( ‘‘ ’’ ) दोहरा अवतरण चिह्न — किसी का कथन ज्यों-का-त्यों लिखने के लिए।
विरामचिह्न से अर्थ बदल जाता है — देखो :
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शब्द वाटिका
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| बरबाद | नाश |
| भंडार | खजाना |
| सन्नाटा | गहन शांति |
| तमाम | सभी |
| भरोसा | विश्वास |
| कामयाब | सफल |
| कटौती | कमी करना |
| आश्वासन | दिलासा |
| छटपटाना | बेचैन होना |
| कौर | ग्रास, निवाला |
मुहावरा :
भाषा की ओर
| पहला शब्द | जोड़ीदार शब्द | पूरा शब्दयुग्म |
|---|---|---|
| अड़ोस | पड़ोस | अड़ोस-पड़ोस |
| बारी | बारी | बारी-बारी |
| अच्छा | बुरा | अच्छा-बुरा |
| नहाना | वहाना | नहाना-वहाना |
| हँसी | खुशी | हँसी-खुशी |
ध्यान दो : शब्दयुग्म में दो शब्द साथ-साथ आते हैं। इसी प्रकार के अन्य शब्दयुग्म — मेल-जोल, दाल-रोटी, खाना-वाना, धीरे-धीरे, आस-पास।
दो-तीन वाक्य में उत्तर लिखो
बबलू पानी और बिजली बरबाद करता था। उसकी इस आदत से उसके माता-पिता परेशान थे। विद्यालय में भी इसी आदत के कारण उसे डाँट खानी पड़ती थी।
शीला मौसी ने बताया कि गरमी बढ़ने से बिजली का भार बढ़ गया है। इसलिए बिजली कंपनी ने कटौती शुरू कर दी है। उस दिन उनके ब्लॉक की बारी थी।
प्यास से बबलू का गला सूख रहा था। खाने का कौर भी गले से नीचे नहीं उतर रहा था। वह बेचैन होकर छटपटाने लगा।
बबलू यह कभी नहीं जान पाया कि पार्टी में जो कुछ हुआ, वह एक नाटक था। उसकी आदत सुधारने के लिए माँ और शीला मौसी ने यह नाटक रचा था।
अध्ययन कौशल
- तालाब — वर्षा का पानी जमा होकर तालाब बनता है। इससे पशुओं को पानी मिलता है। खेतों की सिंचाई भी होती है।
- कुआँ — जमीन खोदकर कुआँ बनाया जाता है। इसमें भूमि के भीतर का पानी जमा होता है।
- झरना — पहाड़ से ऊँचाई से गिरनेवाली जलधारा को झरना कहते हैं। इसका पानी स्वच्छ और ठंडा होता है।
- बादल (वर्षा) — बादलों से वर्षा होती है। वर्षा से ही नदी, तालाब और कुएँ भरते हैं।
- नदी — नदी लगातार बहनेवाली बड़ी जलधारा है। इससे पीने और सिंचाई के लिए पानी मिलता है।
निष्कर्ष : ये सभी हमारी प्राकृतिक जल संपदाएँ हैं। इनका पानी सीमित है। इसलिए इन्हें प्रदूषण से बचाना और पानी किफायत से इस्तेमाल करना हमारा कर्तव्य है।
अन्य कृतियाँ
यदि पानी की टोंटी बोलने लगे, तो वह मुझसे शिकायत करेगी — ‘‘मुझे पूरा खोलकर क्यों छोड़ देते हो? मेरी बूँदें बहुत दूर से चलकर आई हैं। एक मिनट में ही मैं बहुत पानी बहा देती हूँ।’’
फिर वह उदास होकर कहेगी — ‘‘मुझे बंद कर दिया करो। आँगन में गौरैया प्यासी बैठी है। जो पानी तुम्हारे लिए मामूली है, वह किसी के लिए जीवन है।’’ यह सुनकर मैं उसे कसकर बंद कर दूँगा।
कार्टून बनाने का सुझाव : एक टोंटी बनाओ। उसमें आँखें और मुँह जोड़ दो। ऊपर एक संवाद-बुलबुला बनाकर लिखो — ‘‘मुझे बंद करो, मैं रो रही हूँ!’’ टपकती बूँदों को आँसुओं की तरह दिखाओ।
शब्दों का अनुवाद (मराठी → हिंदी) :
वाक्यों का अनुवाद :
टीप : तुम्हारी मातृभाषा जो भी हो, उसके दस शब्द और दो वाक्य चुनकर उनका हिंदी में अनुवाद करो।
- मैं उसका गृहकार्य समझाता हूँ।
- उसे विद्यालय ले जाता हूँ और घर वापस लाता हूँ।
- अपनी चीजें उसके साथ बाँटता हूँ।
- वह रोता है, तो कहानी सुनाकर उसे हँसाता हूँ।
- उसे पानी और बिजली बचाने जैसी अच्छी आदतें सिखाता हूँ।
टीप : यह उत्तर केवल नमूना है। अपने अनुभव के अनुसार अपने शब्दों में बताओ।
सुनो तो जरा : ध्वनिफीति या सी.डी. पर कोई लोकगीत सुनो। उसकी लय और शब्दों पर ध्यान दो। फिर कक्षा में उसके बारे में बताओ।
वाचन जगत से : डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की आत्मकथा ‘अग्नि की उड़ान’ का कोई अंश पढ़ो। फिर कक्षा में उस पर चर्चा करो।
मेरी कलम से : अपने नाना जी / दादा जी को पत्र लिखकर अपने मन की बात बताओ। पत्र में स्थान, दिनांक, संबोधन (पूज्य नाना जी), अभिवादन (सादर प्रणाम), विषय-वस्तु और अंत में ‘आपका प्रिय पोता/नाती’ लिखना न भूलो।
विचार मंथन व सदैव ध्यान में रखो
अक्षय अर्थात जिसका कभी क्षय (नाश) न हो। कोयला और पेट्रोल एक दिन समाप्त हो जाएँगे। पर सूर्य से ऊर्जा बहुत लंबे समय तक मिलती रहेगी। सौर ऊर्जा से धुआँ और प्रदूषण नहीं होता। इसलिए सौर चूल्हा, सौर दीप और सौर पैनल का उपयोग बढ़ रहा है।
पानी और बिजली बचाने के उपाय :
- ब्रश करते या हाथ धोते समय नल बंद रखो।
- टपकती टोंटी तुरंत ठीक करवाओ।
- कमरे से बाहर निकलते ही पंखा, बल्ब और कूलर बंद करो।
- दिन में खिड़कियाँ खोलकर सूर्य के प्रकाश का उपयोग करो।
- वर्षा का पानी इकट्ठा करो।
- बचा हुआ पानी पौधों में डालो।
मैंने समझा
इस कहानी से मैंने समझा कि पानी और बिजली अनमोल हैं। इनका भंडार सीमित है। जब तक कोई वस्तु आसानी से मिलती है, तब तक हमें उसका मोल समझ नहीं आता। बबलू को भी तभी समझ आया, जब उसने स्वयं प्यास सही।
किसी की आदत सुधारने के लिए डाँटने से ज्यादा असर अनुभव का होता है। माँ और शीला मौसी ने एक छोटा-सा नाटक रचकर बबलू को जीवन भर का सबक सिखा दिया।
टीप : ‘मैंने समझा’ में विद्यार्थी को स्वयं के शब्दों में लिखना अपेक्षित है। ऊपर दिया गया उत्तर केवल नमूना है।