कक्षा ८ हिंदी · पहली इकाई

३. नाखून क्यों बढ़ते हैं?

लेखक — आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी | संपूर्ण स्वाध्याय, प्रश्न-उत्तर, और भाषा बिंदु। महाराष्ट्र राज्य पाठ्यपुस्तक मंडळ (सुलभभारती)।

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स्वाध्याय (सूचनानुसार कृतियाँ करो)

१प्रवाह तालिका पूर्ण करो : मनुष्य में पशुत्व से भिन्नता दर्शाने वाली बातें
१. संयम
२. दूसरे के सुख-दुख के प्रति समवेदना
३. श्रद्धा
४. तप और त्याग
२प्रतीक लिखो :
  • नाखूनों को बढ़ाना — पाशवी वृत्ति (पशुता) का प्रतीक
  • नाखूनों को काटना — मनुष्यता की निशानी (स्वधर्म) का प्रतीक
३उत्तर लिखो :
  1. मनुष्य की चरितार्थता इन दो बातों में है :-
    (अ) प्रेम और मैत्री में
    (आ) सबके मंगल के लिए त्याग में
  2. मनुष्य का स्वधर्म यह है :-
    (अ) अपने को संयत रखना
    (आ) दूसरे के मनोभावों का आदर करना
  3. मनुष्य को नाखूनों की जरूरत तब थी :-
    (अ) जब मनुष्य वनमानुष जैसा जंगली था
    (आ) जब उसकी जीवन रक्षा के लिए अस्त्र के रूप में वे बहुत जरूरी थे

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भाषा बिंदु

१निम्न शब्दों के लिंग पहचानकर लिखो : आत्मा, व्यक्ति, बादल, तार, नोट, नाखून, पुस्तक, तकिया, दही
शब्दलिंगवाक्य प्रयोग (समझने के लिए)
आत्मास्त्रीलिंगआत्मा अमर होती है।
व्यक्तिपुल्लिंगवह एक महान व्यक्ति था।
बादलपुल्लिंगकाले बादल घिर आए।
तारपुल्लिंगबिजली का तार टूट गया।
नोटपुल्लिंगयह सौ रुपये का नया नोट है।
नाखूनपुल्लिंगनाखून बढ़ गए हैं।
पुस्तकस्त्रीलिंगमेरी पुस्तक अच्छी है।
तकियापुल्लिंगमेरा तकिया बहुत मुलायम है।
दहीपुल्लिंगदही बहुत खट्टा है।
२अर्थ के अनुसार वाक्यों के प्रकार ढूँढ़कर लिखो।
  • विधानवाचक वाक्य: मनुष्य धीरे-धीरे और आगे बढ़ा।
  • निषेधवाचक वाक्य: मैं कुछ सोच ही नहीं सका।
  • प्रश्नवाचक वाक्य: आखिर ये इतने बेहया क्यों हैं?
  • आज्ञार्थक (अनुज्ञावाचक) वाक्य: काट दीजिए, वे चुपचाप दंड स्वीकार कर लेंगे।
  • इच्छावाचक वाक्य: बच्चे यह जानें तो अच्छा हो।
  • संदेहवाचक वाक्य: शायद उस दिन वह मरणास्त्रों का प्रयोग भी बंद कर देगा।

लेखनीय, मौलिक सृजन व मैंने समझा

★सद्गुणों और दुर्गुणों में अंतर लिखो। [मौलिक सृजन]

सद्गुण: वे अच्छे विचार और आदतें हैं जो मनुष्य को उन्नति के मार्ग पर ले जाती हैं। दया, प्रेम, ईमानदारी, त्याग, क्षमा और परोपकार सद्गुण कहलाते हैं। सद्गुणों के कारण समाज में शांति और भाईचारा बना रहता है, तथा व्यक्ति को सम्मान मिलता है।

दुर्गुण: वे बुरी आदतें और प्रवृत्तियाँ हैं जो मनुष्य का पतन करती हैं। क्रोध, लालच, ईर्ष्या, स्वार्थ और घमंड दुर्गुण कहलाते हैं। दुर्गुणों के कारण समाज में कलह और अशांति फैलती है, तथा व्यक्ति अपने जीवन में कभी सच्चा सुख और शांति प्राप्त नहीं कर पाता।

★'सुरक्षा हेतु शस्त्रों की भरमार' विषय के पक्ष-विपक्ष में अपने विचार लिखो। [लेखनीय]

पक्ष में विचार (सकारात्मक): वर्तमान समय में किसी भी देश की सुरक्षा के लिए मजबूत सेना और उन्नत शस्त्र होना बहुत आवश्यक है। यदि कोई देश सैन्य दृष्टि से कमजोर होता है, तो पड़ोसी शत्रु देश उस पर आसानी से हावी हो सकते हैं। शस्त्रों की भरमार देश के नागरिकों में सुरक्षा की भावना पैदा करती है और बाहरी आक्रमणों से बचने के लिए एक मजबूत दीवार का काम करती है।

विपक्ष में विचार (नकारात्मक): दूसरी ओर, हथियारों की अंधी दौड़ विश्व शांति के लिए एक बहुत बड़ा खतरा है। जब देश अपनी आय का अधिकांश हिस्सा घातक शस्त्र बनाने या खरीदने में खर्च करते हैं, तो शिक्षा, स्वास्थ्य और गरीबी उन्मूलन जैसे महत्वपूर्ण कार्य पीछे छूट जाते हैं। शस्त्रों की भरमार आपसी अविश्वास और तनाव को जन्म देती है, जिससे किसी भी छोटी सी गलतफहमी पर भयंकर युद्ध छिड़ने की संभावना बनी रहती है। अंततः, शस्त्र विनाश के साधन हैं, शांति के नहीं।

★किसी मौलिक मराठी विज्ञापन का हिंदी में अनुवाद करो। [उपयोजित लेखन]

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★मैंने समझा

इस वैचारिक निबंध से मैंने यह समझा कि हमारे भीतर पनपने वाली बुरी आदतें, गुस्सा और हिंसा उसी तरह हमारी पाशवी वृत्ति (पशुता) के प्रतीक हैं जैसे हमारे बढ़ते हुए नाखून। जिस प्रकार हम अपने बढ़े हुए नाखूनों को काटकर साफ रखते हैं, उसी प्रकार हमें अपने भीतर के दुर्गुणों, ईर्ष्या और हिंसक प्रवृत्तियों को भी त्याग देना चाहिए। मनुष्य की सच्ची पहचान उसके अस्त्रों में नहीं, बल्कि उसके प्रेम, दया, त्याग और संयम में है।